Wednesday, February 28, 2024
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काेराेना संक्रमित व्यक्ति के फेफड़ाें ने काम करना कर दिया था बंद; ऑक्सीजन लेवल था न के बराबर,फिजियाेथेरेपी से बढ़ा ऑक्सीजन लेवल,डॉक्टरों के प्रयास से 41 दिन बाद जीत ली जंग…

काेराेना संक्रमित व्यक्ति फेफड़ाें ने काम करना बंद कर दिया था। ऑक्सीजन लेवल न के बराबर था। डॉक्टराें ने चेस्ट फिजियाेथेरेपी कराई, पाेस्ट काेविड सीक्वेल में फिट रखने की प्रक्रिया कर 41 दिन बाद जंग जीती है। जिसके बाद से पूरा मेडिकल स्टाफ काफी खुश है। काेराेना संक्रमित मरीजाें के फेफड़ाें पर वायसर अटैक कर रहा है। काेटमी जांजगीर के एक 50 वर्षीय व्यक्ति काे 25 अगस्त काे गंभीर हालत में मेकाहारा के एसएआरआई वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टराें काे काेराेना का शक था ताे जांच कराई। जांच में रिपाेर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे उसी दिन काेविड हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया गया। यहां पर भर्ती के दाैरान ऑक्सीजन लेवल शून्य पर जा पहुंचा और हालत इतनी बिगड़ी की 20 दिन तक उसे वेंटीलेटर पर रखा। इसके बाद कुछ सुधार हुआ ताे क्रिटिकल केयर में रखा गया। इलाज की प्रक्रिया चलते चलते 25 दिन हाे गए थे। हालत में सुधार की बात ताे दूर रिपोर्ट कई बार पॉजिटिव आई। 19 सितंबर काे जब रिपाेर्ट निगेटिव आई तब भी उसे सांस लेने में परेशानी हाे रही थी और ऑक्सीजन लेवल 80 था। जिस पर उसे पाेस्ट काेविड सीक्वल मानते हुए डा. गणेश पटेल की देखरेख में जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यहां पर डाक्टर की टीम द्वारा चेस्ट फिजियाेथोरेपी दिया गया। पाेस्ट काेविड सीक्वेल में फिट रखने की प्रक्रिया की गई। जिसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ्य हाे सका। डा. गणेश पटेल बताते हैं कि मरीज की हालत बहुत गंभीर थी। रिपाेर्ट निगेटिव आने के बाद भी उठना बैठना ताे दूर ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहा था। उसका फेफड़ा संक्रमित था उनका स्काेर अब भी 16/40 है।

क्या है काेरेड स्काेर 16/40
मरीज का कितने प्रतिशत भाग फेफड़े का संक्रमित हुआ है। इसे जानने के लिए सीटी स्कैन कराया जाता है। जिसमें दाे चीजें जानी जाती है पहला काेरेड स्काेर, जिसमें यह पता लगाया जाता है कि मरीज के फेफड़े का कितना हिस्सा संक्रमित हुआ है। दूसरा कितना हिस्सा खराब हुआ है। फेफड़े के 8 भाग काे 5 हिस्साें में जाेड़ा जाता है। जिससे काेरेड स्काेर 40 माना जाता है और प्रत्येक हिस्से का सीटी स्कैन करते समय सही से आकलन किया जाता है कि कितना भाग खराब है। मरीज में 40 में 16 फीसदी हिस्सा आज भी प्रभावित है। जिसे काेराेना काेरेड स्काेर 16/40 माना जाता है।

  • Krishna Baloon
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