Thursday, February 22, 2024
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बिलासपुर: स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा; शासन से अभी प्लाज्मा थेरेपी को लेकर कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए, सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों को प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति नहीं… निजी अस्पताल चाहें तो प्लाज्मा थेरेपी कर मरीजों का इलाज कर सकते हैं

कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के पास फोन कर मांग रहे प्लाज्मा, कोविड का इलाज कर रहे अस्पताल कर सकते हैं शुरू

बिलासपुर में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी शुरू नहीं हुई है। सरकारी और निजी दोनों अस्पताल को प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति नहीं मिली है। निजी अस्पताल चाहें तो प्लाज्मा थेरेपी कर मरीजों का इलाज कर सकते हैं, ऐसा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कह रहे हैं। जबकि निजी अस्पताल संचालकों का इस बारे में कहना है कि अभी निजी अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत नहीं हुई है। अगर किसी मरीज का परिजन प्लाज्मा लेकर आता है तो उस मरीज को लगा देते हैं, अभी डोनेशन की कोई प्रक्रिया बिलासपुर के अस्पतालों में शुरू नहीं हुई है। इधर जो लोग कोरोना बीमारी से ठीक होकर घर लौट गए हैं, उनके पास प्लाज्मा डोनेट करने के लिए फोन आ रहे हैं। यह फोन अस्पताल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों के परिजन और अस्पताल प्रबंधन या कुछ संस्थाओं के सदस्यों की ओर से किया जा रहा है। प्लाज्मा थेरेपी को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की अनुमति मिलनी जरूरी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन से अभी प्लाज्मा थेरेपी को लेकर कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसलिए सरकारी कोविड अस्पताल में इसकी शुरुआत नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ये भी कहा कि जिले में 8 निजी अस्पतालों को कोरोना के इलाज के लिए मान्यता दी गई है। ये चाहें तो प्लाज्मा थेरेपी से मरीज का इलाज कर सकते हैं। इनके लिए कोई बाध्यता नहीं है। इनका मूल उद्देश मरीज को ठीक करना है। चाहे वो किसी भी दवा या थेरेपी से इलाज करें। लेकिन इन 8 अस्पतालों के अलावा यदि कोई अन्य निजी अस्पताल प्लाज्मा थेरेपी करता है तो यह गलत है।

तीन लोग कर चुके हैं फोन
कोरोना से ठीक होकर घर लौटे शहर के एक 27 वर्षीय युवक ने बताया कि उनके पास प्लाज्मा डोनेट करने के लिए तीन मरीजों के परिजनों के फोन आ चुके हैं। एक महिला ने फोन कर प्लाज्मा डोनेट करने को कहा। जब उससे यह पूछा गया कि आपको नंबर कहां से मिला तो महिला ने जवाब दिया कि प्रशासन से मिला है। वहीं दो अन्य फोन कॉल सामाजिक संस्था के कोई सदस्य ने किया था।

पूछते ही काट दिया फोन
तिफरा निवासी 34 साल के युवक ने बताया कि उनके पास फोन आया और कहा गया कि क्या आप प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। युवक ने जब पूछा कि आपको नंबर कहां से मिला तो उन्होंने बताने से मना कर दिया और फोन काट दिया।

जानिए क्या है प्लाज्मा थेरेपी : प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से स्वस्थ हुए व्यक्ति के खून से प्लाज्मा निकालते हैं। इसे संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। इस थेरेपी में एंटीबॉडी का उपयोग किया जाता है, जो कि किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में बनता है। मरीज पर एंटीबॉडी का असर होने पर वायरस कमजोर होने लगता है। इसके बाद मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। प्लाज्मा खून में मौजूद पीले रंग का तरल पदार्थ होता है। रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स आदि को अलग करने के बाद प्लाज्मा बचता है।

इन मरीजों को देना है प्लाज्मा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार जिन कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत है, खून में ऑक्सीजन का स्तर 90 से 94 फीसद तक होता है। सांस की समस्या, बुखार व अन्य दिक्कत हो, किसी बीमारी से ग्रस्त होने के साथ ही कोरोना संक्रमित हो, ऐसे मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जाती है।

ये दे सकते हैं प्लाज्मा : कोरोना से स्वस्थ हुए मरीज, जिन्हें पहले बुखार रहा हो, शरीर में एंटीबॉडी डेवलप हो चुका हो और किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त न हों। 28 दिनों बाद ऐसे व्यक्तियों से प्लाज्मा लिया जा सकता है। मशीन के माध्यम से डोनर के शरीर से करीब 500 एमएल तक प्लाज्मा निकालते हैं। इसके बाद इसे 250 एमएल के दो भागों में बांटने के बाद स्टोर कर रखा जाता है। प्लाज्मा को एक साल तक उपयोग कर सकते हैं।
प्लाज्मा थेरेपी के लिए अभी अनुमति नहीं : सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी के लिए शासन से अब तक अनुमति नहीं मिली है। इधर महादेव अस्पताल के मालिका डॉ. आशुतोष तिवारी ने कहा कि मेरे अस्पताल में अभी प्लाज्मा थेरेपी शुरू नहीं हुई है। अगर मरीज के परिजन बाहर से प्लाज्मा लाकर देता हैं तो हम उसे मरीज को लगा देते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि मेरे अंदाज से बिलासपुर में अभी किसी भी निजी अस्पताल ने प्लाज्मा थेरेपी शुरू नहीं की है।

  • Krishna Baloon
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