Sunday, June 16, 2024
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हाथरस गैंगरेप मामला: IAS-IPS एसोसिएशन हुए आमने-सामने; IPS एसोसिएशन का सवाल कि जब SP पर कार्रवाई हो सकती है तो डीएम पर क्यों नहीं, IPS अधिकारियों को ही बलि का बकरा क्यों बनाया जाता है…

लखनऊ। हाथरस SP को हटाये जाने का मामला तूल पकड़ गया है। इस मामले में अब IAS-IPS एसोसिएशन आमने-सामने हैं। दरअसल इस मामले में योगी सरकार ने एसपी विक्रांत वीर को सस्पेंड कर दिया, जबकि गंभीर आरोपों से घिरे कलेक्टर प्रवीण कुमार पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। कलेक्टर पर इस केस में कई आरोप लगे हैं, जिसमें परिजनों को धमकाने, प्रताड़ित करने और दुर्व्यवहार जैसे आरोप शामिल हैं।

बावजूद कार्रवाई नहीं होने से आईपीएस अफसर बेहद नाराज हैं। . ख़ास तौर से नये अफ़सर. उन्हें लगता है कि आईपीएस अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जाता है. एक ज़िले के एसपी ने कहा, जब गलती एक तरह की तो फिर सजा सिर्फ हाथरस के एसपी के ही क्यों ? यूपी में आईपीएस अफसरों का एक व्हाट्सएप ग्रुप है. जिसमें राज्य के डीजीपी से लेकर एसपी रैंक के अफसर तक जुड़े हैं. जैसे ही सरकार ने हाथरस के एसपी विक्रांत वीर को निलंबित करने का फैसला सुनाया. इस व्हाट्सएप ग्रुप में हलचल बढ़ गई. राजस्थान के रहने वाले एक आईपीएस ने इस मुद्दे पर एसोसिएशन की बैठक बुलाए जाने की मांग की.

एसोसिएशन का कहना है कि जब एसपी पर कार्रवाई हो सकती है तो डीएम पर क्यों नहीं? अगर कोई लापरवाही हुई है तो अकेले पुलिस महकमा कैसे जिम्मेदार है? जबकि आदेश प्रशासनिक होते हैं और पुलिस महकमा उसे लागू करवाता है.बता दें कि हाथरस मामले में एसपी, डीएसपी पर गाज गिरी थी. दोनों को सस्पेंड कर दिया गया था. इसके अलावा, आदेश दिया गया था कि सभी का नारको पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जाएगा. इसमें पीड़िता का परिवार भी शामिल है. हालांकि पीड़िता के परिवार ने नार्को टेस्ट का विरोध किया है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मौजूदा एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य के खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. एसआईटी की रिपोर्ट में हाथरस के पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर पर लापरवाही का आरोप लगा था.

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