CG: रेलवे ने सास-बहू को नहीं माना एक परिवार का हिस्सा… टिकट ट्रांसफर करने से इंकार, युवक ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री और रेल मंत्रालय को लिखा पत्र

              भिलाई: दुर्ग रेलवे प्रबंधक ने टिकट ट्रांसफर करने के मामले में सास-बहू को एक ही परिवार का हिस्सा मानने से इंकार कर दिया। इस पर आपत्ति जताते हुए भिलाई के संतोष कुमार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रेल मंत्रालय, रेल मंत्री और भारतीय रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा है।

              संतोष कुमार भिलाई के स्मृति नगर क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे का कानून देश के कानून से हटकर है। वो सास और बहू को एक परिवार का हिस्सा नहीं मानते हैं। जबकि बहू उस परिवार का हिस्सा होती है, जिस घर में विवाह कर आती है। कानून ने बहू को सभी अधिकारों के लिए कानूनी हक भी दिया है।

              वो पत्र जिसे उन्होंने लिखकर रेलवे के नियम पर जताई आपत्ति

              वो पत्र जिसे उन्होंने लिखकर रेलवे के नियम पर जताई आपत्ति

              परिवार के साथ दिल्ली जाने करवाया था टिकट

              संतोष ने बताया कि वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अगले महीने दिल्ली किसी काम से जा रहे थे। पत्नी का जाना किसी कारण से कैंसिल हो गया, तो वो उसका टिकट अपनी मां के नाम पर ट्रांसफर करना चाह रहे थे। इसे लेकर दुर्ग रेलवे स्टेशन में आवेदन किया, तो वहां रेलवे ने सास और बहू को एक परिवार का हिस्सा मानने से मना कर दिया।

              संतोष कुमार ने कंप्यूटर में रेलवे के कानून के बारे में दिखाते हुए।

              संतोष कुमार ने कंप्यूटर में रेलवे के कानून के बारे में दिखाते हुए।

              रेलवे ने दिया नियमों का हवाला

              मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक ने संतोष कुमार को लिखित में जवाब दिया है कि 16 अगस्त 1990 को गजट में प्रकाशित नियमों के अनुसार परिवार के अंतर्गत माता-पिता भाई-बहन, बेटा-बेटी पति और पत्नी को ही लिया जाता है। इसलिए सास और बहू के बीच टिकट ट्रांसफर नहीं किया सकता है।

              राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को लिखा पत्र

              संतोष कुमार ने इस नियम पर आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक के जवाब की प्रतिलिपि लगाते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रेल मंत्री ,रेल मंत्रालय के सचिव और भारतीय रेलवे बोर्ड के प्रमुख अफसर पत्र लिखा है।

              संतोष का कहना है कि रेलवे द्वारा सास और बहू को एक परिवार का हिस्सा नहीं मानना गलत है, क्योंकि सास और बहू एक ही घर में रहते हैं। बहू को पति के घर पर कानूनी हक मिलता है। इस वजह से इन्हें एक परिवार का हिस्सा मानना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सास बहू को भी एक परिवार का हिस्सा माना जाए।


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