Thursday, February 19, 2026

              CG News : छत्तीसगढ़ में राजीव युवा मितान क्लब योजना बंद… मंत्री टंकराम ने कहा- भूपेश सरकार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाने बनाई गई थी स्कीम

              RAIPUR: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने भूपेश सरकार में शुरू की गई राजीव युवा मितान क्लब योजना को बंद कर दिया है। मंत्री टंकराम वर्मा कहा कि अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ये योजना बनाई गई थी। छत्तीसगढ़ के युवाओं को इससे कोई लाभ नहीं हो रहा था, इसलिए राजीव युवा मितान योजना को बंद कर दिया गया है।

              हमारी सरकार युवाओं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाएगी। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से राजीव युवा मितान क्लब योजना शुरू की थी, जिसमें प्रति तिमाही क्लब को 25 हजार दिया जाता था।

              कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया

              इस योजना का उद्देश्य राज्य के युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करना, स्वावलंबन को बढ़ावा देना, शिक्षा को बढ़ावा देना, स्वच्छता अभियान से जोड़ना, खेल, शैक्षणिक और सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धाओं को बढ़ावा देना था, लेकिन जानकार बताते हैं कि इस योजना का एकमेव उद्देश्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आर्थिक मदद प्रदान करना था।

              मांगी गई थी खर्च की जानकारी

              राज्य के समस्त कलेक्टरों को राजीव युवा मितान क्लब योजना अंतर्गत अब तक विभिन्न व्यय की जानकारी और व्यय की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रेषित करने को कहा गया था। राजीव गांधी युवा मितान क्लब योजना के तहत बीते 2 साल में राज्य के 13 हजार 269 क्लबों को कुल 132 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।

              हर क्लब में 20 से 40 युवा

              कांग्रेस शासन काल में योजना का शुभारंभ 18 सितंबर 2021 को किया गया। इसमें हर क्लब में 20 से 40 युवा थे। प्रदेश में 13,261 राजीव युवा मितान क्लब गठित करने के लक्ष्य पर 13,242 क्लब बनाए गए थे। हर क्लब को प्रति तीन महीने में 25 हजार रुपये का अनुदान राशि दिए जाने का प्रविधान था।

              योजना के तहत दी जाने वाली राशि पर रोक

              बता दें कि इससे पहले इस योजना के तहत दी जाने वाली राशि पर रोक लगाई गई थी। अब योजना को ही बंद कर दिया गया है. यह राशि जिला स्तरीय समिति, जिला स्तरीय समिति से अनुविभाग स्तरीय समिति के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और नगर निगम आयुक्त के चालू खाते में ट्रांसफर की जाती थी।


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