Monday, February 23, 2026

              Chhattisgarh : लोक अदालत में 56,946 प्रकरण निराकृत, बिलासपुर में 191 करोड़ का अवॉर्ड पारित, चीफ जस्टिस ने लोक अदालतों का किया वर्चुअल निरीक्षण

              BILASPUR: बिलासपुर हाईकोर्ट सहित प्रदेश के जिला न्यायालयों में शनिवार को लोक अदालतों का आयोजन किया गया। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुताबिक राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सुलह समझौता के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न न्यायालयों ने प्रिलिटिगेशन के 680132 प्रकरण रखे।

              इसमें से 583143 प्रकरण निराकृत हुए। वहीं न्यायालय में लंबित 76258 प्रकरण रखे गए, जिसमें से 56946 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 1,91,01,12,616 रुपए का अवार्ड पारित किया गया।

              हाईकोर्ट के सीजे ने किया निरीक्षण

              लोक अदालत का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देश पर किया गया। इस दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने उच्च न्यायालय में आयोजित लोक अदालत का निरीक्षण किया।

              उन्होंने संबंधित खंडपीठों के न्यायाधीश न्यायाधिपति सचिन सिंह राजपूत, रविंद्र कुमार अग्रवाल, अरविंद कुमार वर्मा से बातचीत करते हुए प्रकरणों के संबंध में जानकारी ली। चीफ जस्टिस ने समस्त जिला न्यायालयों का वी़डियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल निरीक्षण किया।

              विचाराधीन प्रकरणों और निराकृत प्रकरणों जानकारी

              जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से उनके जिले में आयोजित लोक अदालतों में विचाराधीन प्रकरणों और निराकृत प्रकरणों के संबंध में जानकारी ली। अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए निर्देशित किया।

              रायपुर जेल में बंद महिला का मामला समाप्त

              जिला न्यायालय धमतरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश , विशेष न्यायाधीश केएल चरयाणी ने जानकारी दी कि उनके न्यायालय में बिजली चोरी का एक प्रकरण पिछले पांच साल से भी अधिक समय से लंबित था। प्रकरण राजीनामा योग्य होने के कारण विशेष रुचि लेते हुए अभियुक्त के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई तो पता चला कि नोटिस तामील नहीं हो पाने से मामला अटका हुआ है।

              दरअसल, अभियुक्ता किसी अन्य अपराध में केंद्रीय जेल रायपुर में सजा भुगत रही है। उनके परिवार में कोई जीवित सदस्य नहीं है, इसलिए नोटिस तामील नहीं हो पा रहा था। केंद्रीय जेल रायपुर के सहयोग से अभियुक्ता से सहमति लेकर जेल में उसे मिलने वाले पारिश्रमिक से उससे अर्थदंड और राजीनामा शुल्क प्राप्त करते हुए प्रकरण का निराकरण किया गया।


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