Thursday, February 19, 2026

              छत्तीसगढ़ की ‘गौरी’ ने अपने 4 बच्चों को मार डाला, जन्म देने के बाद शावकों पर सो गई बाघिन, दम घुटने से मौत

              रांची/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ से 6 साल पहले झारखंड ले जाई गई बाघिन गौरी ने अपने 4 शावकों को दबाकर मार डाला। झारखंड के रांची से लगभग 15 किमी दूर बिरसा जैविक उद्यान में बाघिन गौरी के शावक उसके बेहद करीब चले गए थे। इसी दौरान दबने से चारों की जान चली गई।

              दरअसल, गौरी ने 10 मई की आधी रात को चार बच्चों को जन्म दिया था। बताया जा रहा है कि बाघिन की सीसीटीवी से मॉनिटरिंग भी की जा रही थी। इसके बाद भी ऐसी घटना हो जाना प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही है।

              10 मई को बाघिन गौरी ने 4 शावकों को जन्म दिया था।

              10 मई को बाघिन गौरी ने 4 शावकों को जन्म दिया था।

              मॉनिटरिंग के बाद भी बच्चों को नहीं बचाया जा सका

              बाघिन गौरी के प्रसव होने की जानकारी प्रबंधन को थी। इसके बाद से जिस केज में वह थी, वहां लगाए गए CCTV कैमरे से मॉनिटरिंग भी की जा रही थी। बिरसा जैविक उद्यान प्रबंधन की मानें तो जन्म के बाद सभी नवजात मां के काफी करीब आ गए। जब मां ने करवट बदली तो सभी शावक उसके नीचे दब गए।

              जू प्रबंधन ने चारों के शवों को कैंपस के अंदर ही जला दिया।

              जू प्रबंधन ने चारों के शवों को कैंपस के अंदर ही जला दिया।

              एक शावक की चल रही थी सांसें

              जब प्रबंधन को इस बात का पता चला तो वहां के कर्मी केज के भीतर जाकर देखा। बाघिन को बच्चों से दूर हटाया गया। तीन शावकों की वहीं मौत हो चुकी थी, जबकि एक शावक की सांस चल रही थी, लेकिन उसे भी जब तक संभाला जाता तब तक चौथे ने भी दम तोड़ दिया।

              सीसीटीवी से मॉनिटरिंग के बाद भी बाघिन के चारों बच्चों की मौत हो गई।

              सीसीटीवी से मॉनिटरिंग के बाद भी बाघिन के चारों बच्चों की मौत हो गई।

              डॉक्टर बोले- दम घुटने से सभी की मौत हुई

              बिरसा जू के चिकित्सक डॉ. ओपी साहू ने बताया कि बाघिन गौरी ने पहली बार बच्चों को जन्म दिया था। 10 मई की रात 2 बजे पहले शावक को जन्म दिया, फिर एक के बाद चार शावकों का जन्म हुआ। सभी बच्चे सामान्य और स्वस्थ थे। एक बच्चे का वजन एक किलो था, जबकि अन्य तीन का वजन 900 से 950 ग्राम के बीच था।

              सामान्य तौर पर मां अपने बच्चे का केयर खुद करती है। विषम स्थिति में ही बाहरी सपोर्ट दिया जाता है। 11 मई के पूरे दिन तक सब सामान्य था। चूंकि बाघ के बच्चे की आंख जन्म के 15वें दिन खुलती है। ऐसे में इन दिनों तक मां खुद केयर करती है। वह खुद ही दूध पिलाती है।

              बाघिन के एक बच्चे को उसे दूध पिलाने की कोशिश की गई पर इंटरनल हेंम्रेजेज होने की वजह से मौत हो गई।

              बाघिन के एक बच्चे को उसे दूध पिलाने की कोशिश की गई पर इंटरनल हेंम्रेजेज होने की वजह से मौत हो गई।

              गौरी ने पहली बार शावकों को दिया था जन्म

              गौरी ने पहली बार शावकों को जन्म दिया था। 11 मई की रात बाघिन अपने बच्चों पर ही लेट गई, जिस वजह से दम घुटने से मौत हो गई। जब जानकारी मिली तो एक बच्चे को निकाला गया। उसे दूध पिलाने की कोशिश की गई, लेकिन इंटरनल हेंम्रेजेज होने की वजह से मौत हो गई।

              पोस्टमॉर्टम के बाद 12 मई को जू के भीतर बने दाहगृह ​​​​​​में शवों को जलाया गया। सूत्रों की मानें तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होने की बात सामने आई है।

              पहली बार गर्भवती हुई थी बाघिन गौरी

              जिस बाघिन गौरी के बच्चों की मौत हुई है, उसे छह साल पहले 2018 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर चिड़ियाघर से लाया गया था। बिरसा जू में बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी की पहल के तहत इसे लाया गया था। वह पहली बार गर्भवती हुई थी।

              उसने पूरे 105 दिन के गर्भावस्था के पीरियड को पूरा करने के बाद बच्चों को जन्म दिया था। फिलवक्त बिरसा जू में छह बाघिन हैं, जिसमें गौरी सहित अनुष्का, लक्ष्मी, कावेरी, कृष्णा और ताप्शी हैं। जबकि दो बाघ भी हैं। उनका नाम जावा और मलिक है।


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