Monday, February 16, 2026

              छत्तीसगढ़ : प्राइवेट स्कूलों को बोर्ड लगाकर बतानी होगी फीस, बाल अधिकार संरक्षण आयोग का फरमान- मनमाने तरीके से नहीं वसूल सकते

              रायपुर: छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल अब मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे। उन्हें स्कूलों के बाहर 4 गुना 8 फीट का बोर्ड लगाकर तय की फीस की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। साथ ही इसे स्कूल की वेबसाइट पर भी दिखाना होगा। इसे लेकर बाल संरक्षण आयोग ने आदेश जारी कर दिया है।

              दरअसल, प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर मनमानी रोकने के लिए यह कदम आयोग की ओर से उठाया गया है। आयोग की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ अशासकीय फीस विनियमन और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार फीस होगी।

              बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जारी किया पत्र

              बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जारी किया पत्र

              20 जून तक आयोग को देनी होगी जानकारी

              राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्राइवेट स्कूलों को 20 जून तक कार्यवाही कर तय की गई फीस की सूची का ब्योरा देने के लिए कहा है। यह भी कहा है कि, तय मानक के अनुसार ही फीस की बढ़ोतरी करनी होगी। आयोग ने सभी जिलों के कलेक्टर और जिला फीस समितियों को यह फरमान जारी किया है।

              तय फीस में नहीं मिलेगी छूट

              आयोग ने पत्र में लिखा है कि तय की गई कक्षावार फीस में प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से छूट देने और अन्य नाम से फीस लेने का अधिकार नहीं होगा। एडमिशन या बच्चों के शाला ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में भी छात्रों और पालकों से मनमाने फीस वसूली न की जाए, इसका भी ध्यान रखा जाए।

              आयोग को मिली मनमाने फीस वसूलने की जानकारी

              आयोग की ओर से जारी किए गये पत्र में लिखा है कि स्कूल फीस के अलावा कई नाम से अतिरिक्त कैपिटेशन फीस पालकों से वसूली जा रही है। यह आरटीई अधिनियम की धारा 13 में 10 गुना जुर्माने से दंडनीय अपराध है। फीस विनियमन अधिनियम की धारा 12 में स्कूल की प्रबंधन समिति के सदस्यों पर भी चार गुना जुर्माने से दंडनीय है।

              अनियमितता की वजह से तय नहीं हो पा रहा फीस

              आयोग का कहना है कि संज्ञान में यह आया है कि छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूलों में फीस विनियमन कानून के अनुसार स्कूलों में स्कूल फीस समिति में जागरूक और निष्पक्ष अभिभावकों को शामिल नहीं करने, आय- व्यय से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं करने, और जिला फीस समिति की नियमित बैठक नहीं करने की वजह से प्रथम बार की उपयुक्त फीस का निर्धारण नहीं हो पाया है।


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