Wednesday, February 11, 2026

            नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जजों का अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का फैसला, जानकारी वेबसाइट पर अपलोड होगी, जस्टिस यशवंत वर्मा केस के बाद लिया निर्णय

            नई दिल्ली: ज्यूडीशियरी में ट्रांसपैरेंसी और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने पदभार ग्रहण करने के दौरान ही अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का फैसला किया है।

            1 अप्रैल को हुई फुल कोर्ट मीटिंग में सभी 34 जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना की मौजूदगी में अपनी संपत्ति का खुलासा करने का फैसला लिया है।

            जजों ने यह भी कहा कि संपत्तियों से जुड़ी डीटेल सुप्रीम कोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। हालांकि, वेबसाइट पर संपत्ति की घोषणा स्वैच्छिक होगी।

            सुप्रीम कोर्ट में जजों की निर्धारित संख्या 34 है। फिलहाल यहां 33 जज हैं, एक पद खाली है। इनमें से 30 जजों ने अपनी संपत्ति का घोषणा पत्र कोर्ट में दे दिया है। हालांकि, इन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है।

            यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से कैश मिलने के विवाद के बाद लिया गया है। जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में 14 मार्च को आग लगी थी। फायर सर्विस टीम को वहां अधजले नोट मिले थे।

            सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति की घोषणा से जुड़े बड़े घटनाक्रम

            • 1997 का प्रस्ताव: 1997 में, तत्कालीन CJI जे एस वर्मा ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें जजों से अपेक्षा की गई कि वे अपनी संपत्ति की घोषणा चीफ जस्टिस को करें। हालांकि, यह घोषणा सार्वजनिक नहीं की जानी थी। ​
            • 2009 का न्यायाधीश संपत्ति विधेयक: 2009 में, “न्यायाधीश संपत्ति और देनदारियों की घोषणा विधेयक” संसद में प्रस्तुत किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों को अपनी संपत्ति की घोषणा करने कहा गया था, लेकिन इसमें यह प्रावधान था कि घोषणाएं सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। इस प्रावधान के कारण विधेयक को विरोध का सामना करना पड़ा और इसे स्थगित कर दिया गया। ​
            • 2009 में संपत्ति की घोषणाएं: 2009 में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दबाव और पारदर्शिता की बढ़ती मांग के कारण, कुछ जजों ने अपनी मर्जी से संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक की।

            जस्टिस वर्मा का दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर

            कैश मामले में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आदेश जारी किया गया है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया गया है कि जस्टिस वर्मा को कोई न्यायिक काम न सौंपा जाए।

            मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की इंटरनल जांच कमेटी कर रही है। जिसमें 3 जज हैं। इस कमेटी के सामने जस्टिस यशवंत वर्मा की पेशी जल्द हो सकती है।


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