Monday, February 16, 2026

              रायपुर: वन्यजीवों के शिकार की साज़िश नाकाम

              • दो आरोपी जेल भेजे गए, वाहन व हथियार जब्त

              रायपुर (BCC NEWS 24): वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग द्वारा वन्य अपराधों पर अंकुश लगाया जा रहा है। मंत्री श्री कश्यप ने वन्य अपराधों में लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इसी कड़ी में बारनवापारा अभ्यारण्य में वन्यजीवों के शिकार की बड़ी साजिश को बलौदा बाजार वन विभाग की सजग टीम ने समय रहते विफल कर दिया। गश्त के दौरान दो आरोपियों को गिरफ़्तार कर उनके पास से वाहन, एयर गन, टॉर्च और अन्य सामग्री जब्त की गई। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

              वनमंडलाधिकारी श्री गणवीर धम्मशील के निर्देशन में की गई इस त्वरित कार्रवाई में उप वनमंडलाधिकारी श्री आनंद कुदरिया (बारनवापारा), श्री अनिल वर्मा (कसडोल) प्रशिक्षु श्री गजेन्द्र वर्मा तथा परिक्षेत्र अधिकारी श्री जीवन लाल साहू के नेतृत्व में टीम ने रात्रि 10.30 बजे कोठारी क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 223 और सोनाखान परिक्षेत्र के नवागांव (कक्ष क्रमांक 247) में चल रही संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखी।

              उन्होंने जांच के दौरान वाहन क्रमांक ब्ळ 12 ।न् 1332 वेगानआर गाड़ी को रोका गया, जिसमें बंटी कुमार मैथ्यूज (ग्राम कटगी, कसडोल) और सुरेंद्र फरमान दास (कोरबा निवासी) सवार थे। तलाशी में एयर गन, टॉर्च और दो मोबाइल सहित संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि इनका उद्देश्य बारनवापारा क्षेत्र में वन्यजीवों का शिकार करना था। वन विभाग ने दोनों आरोपियों पर वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 और आयुध अधिनियम 1959 के तहत मामला दर्ज किया और उन्हें प्रथम श्रेणी न्यायालय बलौदा बाजार में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

              वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा ज़िम्मेदारी है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें। उन्होंने नागरिकों और वन्यप्रेमियों से अपील की कि वन्यप्राणियों की रक्षा हेतु विभाग का सहयोग करें। इस ऑपरेशन में महेंद्र लाल यादव, योगेश कुमार साहू, बिमलेश वर्मा, बुद्धेश्वर दिवाकर, खगेश्वर ध्रुव, भूपेन्द्र बंजारे, सुरक्षा श्रमिकों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही।


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