अहमदाबाद प्लेन हादसा: अमेरिका में बोइंग-हनीवेल कंपनियों पर केस दर्ज, पीड़ित परिवार बोले- खतरे को जानकर भी एक्शन नहीं लिया

              वॉशिंगटन डीसी: अहमदाबाद प्लेन क्रैश में मारे गए 4 यात्रियों के परिवारों ने अब अमेरिका में विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग और उसके पुर्जे बनाने वाली कंपनी हनीवेल के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।

              BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवारों का आरोप है कि दोनों कंपनियों की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ। यह मुकदमा टेक्सास की लैनियर लॉ फर्म के जरिए दायर किया गया है।

              इसमें कहा गया है कि विमान में लगे ईंधन स्विच में खराबी थी और यही हादसा की वजह बना। परिवारों का आरोप है कि बोइंग और हनीवेल इन खतरों के बारे में पहले से जानते थे, लेकिन उन्होंने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया।

              एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर 12 जून को अहमदाबाद से उड़ान भरकर लंदन के गैटविक हवाई अड्डा जा रहा था।। टेकऑफ के कुछ ही देर बाद यह एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गया था। इसमें 270 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें 60 विदेशी यात्री शामिल थे।

              बोइंग विमान क्रैश में 270 लोग मारे गए थे, जिनमें 60 विदेशी भी शामिल थे।

              बोइंग विमान क्रैश में 270 लोग मारे गए थे, जिनमें 60 विदेशी भी शामिल थे।

              बोइंग ने कोई टिप्पणी नहीं की

              बोइंग ने इस मुकदमे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। उसने सिर्फ इतना कहा कि भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट इस मामले पर जानकारी देती है।

              हनीवेल से भी BBC ने संपर्क किया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। फिलहाल हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट 2026 में आने की उम्मीद है। इस दुर्घटना में विमान में सवार 229 यात्री, 12 क्रू सदस्य और जमीन पर मौजूद 19 लोग मारे गए थे।

              इंजन में फ्यूल सप्लाई बंद होने से हादसा हुआ था

              शुरुआती जांच में पता चला है कि विमान के इंजनों तक फ्यूल की सप्लाई अचानक बंद हो गई थी। जांचकर्ताओं ने पाया कि ईंधन स्विच ‘रन’ से ‘कट-ऑफ’ पर चला गया था। पायलट ने 10 सेकेंड बाद दोबारा इन्हें चालू किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

              इसकी वजह से इंजनों तक ईंधन पहुंचना रुक गया और विमान को उड़ते रहने के लिए जो ताकत (थ्रस्ट) चाहिए थी, वह पूरी तरह खत्म हो गई।परिवारों का कहना है कि यह डिजाइन की खामी थी।

              उनके मुताबिक, स्विच की वजह से अनजाने में ईंधन की आपूर्ति बंद हो सकती थी और यही इस हादसे की जड़ थी। उन्होंने बोइंग और हनीवेल पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस समस्या को ठीक करने या रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

              कॉकपिट की रिकॉर्डिंग से पता चला था कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा था कि क्या तुमने स्विच बंद किया है? दूसरे ने जवाब दिया, नहीं। रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि उड़ान से पहले फ्लाइट के एक सेंसर में परेशानी थी जिसे ठीक किया गया।

              हादसे के 4 हफ्ते पहले स्विच चेक करने की चेतावनी मिली थी

              बोइंग विमानों के रखरखाव को लेकर ब्रिटेन की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) ने अहमदाबाद प्लेन क्रैश के चार हफ्ते पहले बोइंग विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर को लेकर अलर्ट जारी किया था।

              CAA ने 15 मई को एयरलाइनों को निर्देश दिए थे कि वे अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के निर्देशों का पालन करें। FAA ने अपने निर्देश में बोइंग 737, 757, 767, 777 और 787 विमानों में फ्यूल शटऑफ वॉल्व एक्ट्यूएटर्स को संभावित खतरा बताया था।

              CAA ने ब्रिटेन आने वाली सभी एयरलाइनों को आदेश भी दिया था कि वे इन वॉल्व्स की जांच करें, जरूरत हो तो बदलें या रिपेयर करें और रोजाना जांच को अनिवार्य रूप से करें। वहीं, प्राइमरी रिपोर्ट में सामने आया है कि प्लेन के फ्यूल स्विच बंद होने की वजह से अहमदाबाद हादसा हुआ था।

              परिवारों का आरोप- कंपनियों ने एयरलाइनों को खतरे की जानकारी नहीं दी

              दरअसल, 2018 में यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने प्लेन ऑपरेटरों को सलाह दी थी कि वे ईंधन स्विच के लॉकिंग सिस्टम की जांच करें ताकि यह गलती से न हिले।

              लेकिन यह सिर्फ एक सलाह थी, इसे लागू करना अनिवार्य नहीं था। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि कंपनियों ने न तो एयरलाइनों को इस खतरे के बारे में पर्याप्त चेतावनी दी और न ही समय पर ऐसे पुर्जे उपलब्ध कराए जो समस्या को दूर कर सकते थे।

              पहली बार क्रैश हुआ बोइंग 787 प्लेन

              बीबीसी के मुताबिक यह पहली बार है जब कोई बोइंग 787 विमान क्रैश हुआ है। इसे ड्रीमलाइनर के नाम से भी जाना जाता है। बोइंग ने इस मॉडल को 14 साल पहले लॉन्च किया गया था। बोइंग ने अप्रैल में ऐलान किया था कि ड्रीमलाइनर पर 100 करोड़ लोग यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान बोइंग 787 ने 50 लाख उड़ानें भरी हैं।


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