रायपुर : अरपा उद्गम स्थल विकास हेतु 12.53 करोड़ की मिली स्वीकृति

              • जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण होगा

              रायपुर: राज्य शासन ने गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के विकासखण्ड पेण्ड्रा में अरपा नदी के उद्गम स्थल के विकास एवं जलकुण्ड निर्माण (भू-अर्जन सहित) हेतु बारह करोड़ तिरपन लाख सन्तानवे हजार रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह राशि अंतिम स्वीकृत लागत होगी तथा विभाग को इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य होगा। इस परियोजना के अंतर्गत अरपा नदी के उद्गम स्थल का विकास, पुनरूत्थान एवं जलकुण्ड का निर्माण किया जाएगा। योजना से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

              वित्त विभाग ने 22 सितंबर 2025 को इस प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया है। कार्य प्रारंभ करने से पूर्व तकनीकी स्वीकृति और ड्रॉइंग-डिजाइन सक्षम अधिकारी से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा। योजना पर व्यय अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है।

              निर्माण कार्य की निविदा केवल तब आमंत्रित की जाएगी जब कम से कम 75 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होगी। यदि भू-अर्जन आवश्यक होगा तो इसकी कार्यवाही स्वीकृत राशि की सीमा में ही की जाएगी और अन्य मदों की राशि का उपयोग बिना स्वीकृति नहीं किया जाएगा। यदि भू-अर्जन आवश्यक नहीं है तो निर्माण कार्य शासकीय भूमि पर ही कराया जाएगा।

              शासन ने स्पष्ट किया है कि निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी होनी चाहिए और पर्याप्त प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जानी चाहिए। व्यय स्वीकृत सीमा में ही होगा तथा निर्माण कार्य में मितव्ययिता अपनाई जाएगी। निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री और संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निर्माण कार्य अनुबंध के अनुसार समयसीमा में पूर्ण करना आवश्यक होगा। अनावश्यक समयवृद्धि स्वीकार नहीं की जाएगी। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा बढ़ाई जा सकेगी तथा विलंब की स्थिति में अर्थदण्ड अधिरोपित किया जाएगा।

              मुख्य अभियंता को परियोजना पर पूर्ण नियंत्रण रखने तथा अधीनस्थ अधिकारियों से प्रशासकीय और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। यह परियोजना लोकहित की भावना के अनुरूप है तथा क्षेत्र के प्राकृतिक एवं सामाजिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।


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