Friday, February 27, 2026

              अमेरिका: डेमोक्रेट उम्मीदवार ममदानी ने न्यूयॉर्क मेयर चुनाव जीता, पहले भारतवंशी और पहले मुस्लिम मेयर होंगे, ‘धूम मचा ले’ गाने पर झूमे; मां मीरा नायर ने मंच पर गले लगाया

              वॉशिंगटन डीसी: भारतीय मूल के डेमोक्रेट उम्मीदवार जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जीत लिया है। उन्हें 50.4% वोट मिले। वे मानसून वेडिंग और सलाम बॉम्बे जैसी फिल्में डायरेक्ट करने वाली मीरा नायर के बेटे हैं।

              ममदानी पिछले 100 सालों में न्यूयॉर्क के सबसे युवा, पहले भारतवंशी और पहले मुस्लिम मेयर होंगे। अपनी विक्ट्री स्पीच में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को दिए गए ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ का जिक्र किया।

              भाषण के बाद वे अपनी पत्नी के साथ ‘धूम मचा ले’ गाने पर झूमते नजर आए। मां मीरा नायर ने मंच पर आकर उन्हें गले लगा लिया। पिता महमूद ममदानी भी मौजूद रहे।

              न्यूयॉर्क मेयर चुनाव में जीत के ममदानी ने ब्रुकलिन पैरामाउंट थिएटर में समर्थकों को संबोधित किया।

              ममदानी ने अपनी जीत को न्यूयॉर्क के हर नागरिक की जीत बताया।

              ममदानी ने अपनी जीत को न्यूयॉर्क के हर नागरिक की जीत बताया।

              जोहरान ममदानी ने मेयर चुनाव जीतने के बाद मां मीरा नायर को गले लगा लिया।

              जोहरान ममदानी ने मेयर चुनाव जीतने के बाद मां मीरा नायर को गले लगा लिया।

              ममदानी अपनी पत्नी के साथ जीत के बाद भाषण देने पहुंचे।

              ममदानी अपनी पत्नी के साथ जीत के बाद भाषण देने पहुंचे।

              विजयी भाषण के ममदानी और उनकी पत्नी एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए नजर आए।

              विजयी भाषण के ममदानी और उनकी पत्नी एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए नजर आए।

              जोहरान ममदानी के साथ पत्नी के अलावा उनके पिता महमूद ममदानी और मां मीरा नायर भी मंच पर पहुंचीं।

              जोहरान ममदानी के साथ पत्नी के अलावा उनके पिता महमूद ममदानी और मां मीरा नायर भी मंच पर पहुंचीं।

              ममदानी के सामने 3 बड़ी चुनौतियां

              1. अपने वादे पूरे करना

              ममदानी ने वादा किया है कि वे न्यूयॉर्क में सभी बच्चों के लिए फ्री केयर शुरू करेंगे, सब्सिडी वाले घरों का किराया फ्रीज करेंगे, पब्लिक बसों में मुफ्त यात्रा देंगे और सिटी की अपनी किराने की दुकानें खोलेंगे।

              उनका कहना है कि इसके लिए अमीरों और बड़ी कंपनियों पर नए टैक्स लगाकर 9 अरब डॉलर जुटाए जाएंगे। लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन वादों को पूरा करना बहुत मुश्किल है।

              2. ट्रम्प का सामना

              अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि वे न्यूयॉर्क की फेडरल फंडिंग रोक सकते हैं। अगर वे ऐसा कदम उठाते हैं तो ममदानी की परेशानी बढ़ सकती है।

              3. डेमोक्रेटिक पार्टी में तालमेल बनाना

              ममदानी डेमोक्रेटिक पार्टी के वामपंथी धड़े से आते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी के मध्यम मार्गी धड़े को खुश करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।

              कुल मिलाकर, ममदानी के लिए असली परीक्षा अब शुरू हुई है। अपने वादों को सच करना, विरोधियों के हमले झेलना और अपनी ही पार्टी में भरोसा बनाना।

              जोहरान ममदानी की जीत के बाद जश्न मनाते हुए उनके समर्थक।

              जोहरान ममदानी की जीत के बाद जश्न मनाते हुए उनके समर्थक।

              जोहरान ममदानी की जीत की 4 बड़ी वजह

              1. महंगाई का मुद्दा

              ममदानी ने पूरे कैंपेन में सिर्फ एक बात पर फोकस किया कि न्यूयॉर्क बहुत महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम है लोगों की जिंदगी आसान बनाना। उनके रैलियों में लगे बैनर पर नारे लिखे थे कि एक शहर जो हम अफोर्ड कर सकें और सस्ता घर बनाओ।

              2. जनता से सीधा जुड़ाव

              राजनीति में ज्यादातर वक्त बातें घुमा-फिराकर कही जाती हैं, लेकिन ममदानी ने बिल्कुल साफ बात की। उन्होंने खुलकर कहा कि अमीरों पर टैक्स लगाओ, बच्चों की देखभाल बढ़ाओ और घर को हक बनाओ।

              3. इंटरनेट का सही इस्तेमाल

              ममदानी को पार्टी के बड़े नेताओं का सपोर्ट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने जनता और इंटरनेट का सहारा लिया। उन्होंने स्कैवेंजर हंट, फुटबॉल टूर्नामेंट और LGBTQ बार में देर रात पॉप-अप इवेंट किए। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, उन्होंने सभी पुराने नियम तोड़ दिए और सीधे लोगों से रिश्ता बनाया।

              4. युवा कार्यकर्ताओं पर फोकस

              ममदानी ने स्वयंसेवकों की संख्या में इजाफा किया। उनकी प्रचार टीम में शामिल युवा उनसे भी कम उम्र के हैं। ज्यादातर को इतने बड़े पैमाने पर काम करने का बहुत कम अनुभव था। लेकिन वे सामान्य सलाहकारों और रणनीतिकारों की तुलना में अधिक सक्षम और प्रभावी साबित हुए।


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