वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि वे अगले साल भारत आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा आगे बढ़ रही है।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत में ट्रम्प ने एक बार फिर PM मोदी को अपना दोस्त और अच्छा इंसान बताया। ट्रम्प ने कहा-
हम बात करते रहते हैं। उन्होंने रूस से तेल की खरीद काफी कम कर दी है। PM मोदी ने मुझे भारत आने का न्योता दिया है और मैं वहां जाने की सोच रहा हूं।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे अगले साल भारत जाएंगे, तो ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए कहा कि हां, हो सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के भारत दौरे के बारे में अभी कुछ कहने को नहीं है। जैसे ही कुछ होगा बताया जाएगा।
ट्रम्प का फिर दावा- भारत-पाकिस्तान युद्ध रोका
वहीं, ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध को टैरिफ का डर दिखाकर रोक दिया था। उन्होंने कहा- आठ युद्धों में से पांच-छह मैंने टैरिफ की मदद से खत्म किए। भारत और पाकिस्तान युद्ध के कगार पर थे, दोनों परमाणु देश हैं। आठ विमान गिराए गए थे। मैंने कहा, अगर तुम लड़ोगे, तो मैं दोनों पर टैरिफ लगाऊंगा। और 24 घंटे में मामला सुलझ गया।
ट्रम्प ने क्वाड समिट में भारत नहीं आने का किया था फैसला
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने पहले इस साल होने वाले क्वाड सम्मेलन में भारत नहीं आने का फैसला किया था। यह फैसला तब लिया गया था जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर ज्यादा टैक्स (शुल्क) लगा दिया था।
भारत पर प्रतिबंध का मकसद रूस पर दबाव बनाना
अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है।
ट्रम्प प्रशासन रूस से तेल लेने पर भारत के खिलाफ की गई आर्थिक कार्रवाई को पैनल्टी या टैरिफ बताता रहा है।
ट्रम्प भारत पर अब तक कुल 50 टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है।
रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलिना लेविट के मुताबिक इसका मकसद रूस पर सेकेंडरी प्रेशर डालना है, ताकि वह युद्ध खत्म करने पर मजबूर हो सके।
रूस से सस्ता तेल खरीदने की शुरुआत कैसे हुई?
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद रूस ने अपने तेल को एशिया की ओर मोड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने 2021 में रूसी तेल का सिर्फ 0.2% आयात किया था।
2025 में यह भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। औसतन 1.67 मिलियन बैरल प्रति दिन की आपूर्ति कर रहा है। यह भारत के कुल जरूरत का करीब 37% है।
भारत रूस से तेल खरीदना क्यों नहीं बंद करता?
भारत को रूस से तेल खरीदने के कई डायरेक्ट फायदे हैं…
- अन्य देशों से सस्ता तेल: रूस अभी भी भारत को दूसरे देशों की तुलना में सस्ता तेल दे रहा है। हालांकि, जो डिस्काउंट पहले 30 डॉलर प्रति बैरल तक था वह अब 3-6 डॉलर प्रति बैरल तक रह गया है।
- लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स: भारत की प्राइवेट कंपनियों के रूस के साथ लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2024 में रिलायंस ने रूस के साथ 10 साल के लिए हर रोज 5 लाख बैरल तेल खरीदी का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस तरह के समझौतों को रातोंरात तोड़ना संभव नहीं है।
- वैश्विक कीमतों पर प्रभाव: भारत का रूसी तेल आयात वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो ग्लोबल सप्लाई कम हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध के बाद मार्च 2022 में तेल की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
भारत के पास रूस के अलावा किन देशों से तेल खरीदने के विकल्प हैं?
भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से ज्यादा इम्पोर्ट करता है। ज्यादातर तेल रूस के अलावा इराक, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से खरीदता है। अगर रूस से तेल इम्पोर्ट बंद करना है तो उसे इन देशों से अपना इम्पोर्ट बढ़ाना होगा…
- इराक: रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, जो हमारे इम्पोर्ट का लगभग 21% प्रोवाइड करता है।
- सऊदी अरब: तीसरा बड़ा सप्लायर, जो हमारी जरूरतों का 15% तेल (करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन) सप्लाई करता है।
- अमेरिका: जनवरी-जून 2025 में भारत ने अमेरिका से रोजाना 2.71 लाख बैरल तेल इम्पोर्ट किया, जो पिछले से दोगुना है। जुलाई 2025 में अमेरिका की हिस्सेदारी भारत के तेल आयात में 7% तक पहुंच गई।
- साउथ अफ्रीकन देश: नाइजीरिया और दूसरे साउथ अफ्रीकन देश भी भारत को तेल सप्लाई करते हैं और सरकारी रिफाइनरीज इन देशों की ओर रुख कर रही हैं।
- अन्य देश: अबू धाबी (UAE) से मुरबान क्रूड भारत के लिए एक बड़ा ऑप्शन है। इसके अलावा, भारत ने गयाना ब्राजील, और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल आयात शुरू किया है। हालांकि, इनसे तेल खरीदना आमतौर पर रूसी तेल की तुलना में महंगा है।

(Bureau Chief, Korba)




