Monday, February 9, 2026

            नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- वंदे मातरम् भारत की आजादी का उद्घोष था, 1937 में इस गीत का एक हिस्सा हटा दिया गया, इसी विभाजन ने देश के बंटवारे का बीज बोया

            नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- वंदे मातरम् भारत की आजादी का उद्घोष था। यह हर दौर में प्रासंगिक है। 1937 में वंदे मातरम् का एक हिस्सा हटा दिया गया था। उसके टुकड़े कर दिए थे। वंदे मातरम् के इस विभाजन ने देश के विभाजन के बीज बोए थे। राष्ट्र निर्माण के इस महामंत्र के साथ ये अन्याय क्यों हुआ? वही विभाजनकारी सोच आज भी देश के लिए चुनौती बनी हुई है।

            प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के मौके पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा-

            वंदे मातरम् के मूल रूप में लिखा है कि भारत माता सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा हैं। जब दुश्मन ने आतंक के लिए जरिए भारत की सुरक्षा और सम्मान पर हमला करने का दुस्साहस किया, तो पूरी दुनिया ने देखा, नया भारत आतंक के विनाश के लिए दुर्गा भी बनना जानता है।

            प्रधानमंत्री ने राष्ट्र गीत के 150 साल पूरे होने के मौके पर एक डाक टिकट और सिक्का जारी किया। उन्होंने साल भर चलने वाले स्मरण समारोह का उद्घाटन किया और एक वेबसाइट भी लॉन्च की। PM ने वंदे मातरम् के सामूहिक गायन कार्यक्रम में भी भाग लिया।

            PM की स्पीच की अहम बातें-

            1. प्रधानमंत्री ने कहा- रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था कि बंकिमचंद्र का ‘आनंदमठ’ सिर्फ एक उपन्यास नहीं है। यह स्वतंत्र भारत का एक सपना है। बंकिम बाबू के लिखे हर शब्द का गहरा मतलब है। इस गीत की रचना गुलामी के दौर में हुई थी, लेकिन यह सिर्फ उसी समय तक सीमित नहीं है। वंदे मातरम् हर युग में प्रासंगिक है।
            2. PM ने कहा- जब 1875 में बंकिम चंद्र ने बंगदर्शन में वंदे मातरम् प्रकाशित किया, तो कुछ लोगों ने सोचा कि यह सिर्फ एक गीत है। हालांकि, धीरे-धीरे, वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लाखों लोगों की आवाज बना। एक ऐसी आवाज, जिसने हर भारतीय की भावनाओं की प्रतिध्वनि की।
            3. मोदी ने कहा- आज जब हम अपने राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, यह हमारे देश के महान नायकों के प्रति श्रद्धांजलि है। उन लाखों शहीदों को नमन है, जिन्होंने फांसी पर चढ़ते हुए वंदे मातरम् का नारा लगाया, जिन्होंने वंदे मातरम् जपते हुए कोड़ों की मार झेली।
            4. मोदी ने कहा- वंदे मातरम् एक शब्द, एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक संकल्प है। वंदे मातरम् हमें इतिहास में ले जाता है। ये हमारे भविष्य को नया हौसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धि न हो सके, ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जो हम भारतवासी पा न सकें।
            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम के दौरान स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया।

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम के दौरान स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया।

            PM ने 'वंदे मातरम्, नाद एकम, रूपम अनेक' कार्यक्रम देखा, जहां देश के प्रसिद्ध कलाकारों ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक गायन शैलियों में वंदे मातरम् की प्रस्तुति दी।

            PM ने ‘वंदे मातरम्, नाद एकम, रूपम अनेक’ कार्यक्रम देखा, जहां देश के प्रसिद्ध कलाकारों ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक गायन शैलियों में वंदे मातरम् की प्रस्तुति दी।

            देश में एक साल तक चलेगा कार्यक्रम

            वंदे मातरम् का 150वीं एनिवर्सरी इवेंट 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में चलेगा। दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम के अलावा सुबह करीब 10 बजे देशभर के सार्वजनिक स्थानों पर लोगों ने वंदे मातरम् गीत का सामूहिक गायन किया।

            भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

            वंदे मातरम् की राष्ट्रगीत बनने की कहानी…

            7 नवंबर 1875 को बंकिम चन्‍द्र चटर्जी ने वंदे मातरम् को पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित किया। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।

            वंदे मातरम् गाने पर बच्चों पर 5 रुपए का जुर्माना लगा

            1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में वंदे मातरम् जनता की आवाज बन गया। रंगपुर के एक स्कूल में जब बच्चों ने यह गीत गाया, तो ब्रिटिश प्रशासन ने 200 छात्रों पर 5-5 रुपए का जुर्माना लगाया। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने वंदे मातरम् कहा था।

            ब्रिटिश सरकार ने कई स्कूलों में वंदे मातरम् गाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय छात्रों ने कक्षाएं छोड़ दीं, जुलूस निकाले और यह गीत गाना नहीं छोड़ा। कई जगह पुलिस ने उन्हें मारा, जेल में डाला गया।

            17 अगस्त 1909 को जब मदनलाल ढींगरा को इंग्लैंड में फांसी दी गई। उनके आखिरी शब्द वंदे मातरम् थे।

            संविधान सभा में वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत घोषित किया

            देश को आजादी मिलने के बाद संविधान सभा को राष्ट्रगीत तय करना था। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि वंदे मातरम् गीत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसे राष्ट्रगीत जन गण मन के बराबर सम्मान और दर्जा दिया जाएगा। इसके साथ ही वंदे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।


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