Monday, March 2, 2026

              PM मोदी 2 दिन के दौरे पर भूटान पहुंचे, दिल्ली ब्लास्ट पर भावुक हुए, कहा- भारी मन से यहां आया, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

              थिम्पू: पीएम मोदी ने दिल्ली में हुए ब्लास्ट को लेकर कहा कि इस घटना में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मोदी 2 दिन के दौरे पर आज ही भूटान पहुंचे हैं।

              उन्होंने स्पीच देते हुए कहा कि वे यहां पर भारी मन से आए हैं। कल शाम दिल्ली में हुई भयावह घटना से सभी के मन को दुखी कर दिया है।

              मोदी ने आगे कहा, ‘इस साजिश के पीछे जो भी लोग हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। हमारी एजेंसियां इस साजिश की तह तक जाएंगी।’

              पीएम मोदी की भूटान दौरे की 4 तस्वीरें…

              पीएम मोदी मंगलवार को सुबह 10:30 बजे के करीब भूटान दौरे पर पहुंचे हैं। यह 11 साल उनकी भूटान की चौथी यात्रा है।

              पीएम मोदी मंगलवार को सुबह 10:30 बजे के करीब भूटान दौरे पर पहुंचे हैं। यह 11 साल उनकी भूटान की चौथी यात्रा है।

              पीएम मोदी का मंगलवार को भूटान की राजधानी थिम्पू में शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया।

              पीएम मोदी का मंगलवार को भूटान की राजधानी थिम्पू में शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया।

              भूटान के थिम्पू पहुंचने पर मोदी को गुलदस्ता भेंट किया गया।

              भूटान के थिम्पू पहुंचने पर मोदी को गुलदस्ता भेंट किया गया।

              एयरपोर्ट पर भूटान के प्रधानमंत्री त्सेरिंग तोबगे ने पीएम मोदी का स्वागत किया।

              एयरपोर्ट पर भूटान के प्रधानमंत्री त्सेरिंग तोबगे ने पीएम मोदी का स्वागत किया।

              दिल्ली ब्लास्ट में 9 की मौत, भूटान में लोगों ने प्रार्थना की

              मोदी सोमवार को दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट को लेकर भावुक हो गए। मोदी ने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दोषियों को सजा देने की बात कही।

              दरअसल, सोमवार शाम 6.52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास चलती कार में जोरदार धमाका हुआ। इसमें अब तक 9 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 24 घायल हैं।

              दिल्ली पुलिस ने विस्फोट को लेकर UAPA के तहत FIR दर्ज की है। सुरक्षा एजेंसियों ने आत्मघाती हमले के एंगल से भी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मौके से आरडीएक्स के सबूत नहीं मिले हैं।

              भूटान के महामहिम नरेश ने थिम्पू के चांगलिमथांग स्टेडियम में हजारों भूटानी लोगों के साथ दिल्ली विस्फोट के पीड़ितों के लिए प्रार्थना की।

              मोदी बोले- हमारे पूर्वजों की प्रेरणा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’

              मोदी ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ भारत में हमारे पूर्वजों की प्रेरणा रही है। इसका मतलब है- पूरी दुनिया एक परिवार है।

              पीएम ने कहा कि भारत ने इसी भावना के साथ भूटान में आयोजित ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल में भाग लिया है। आज दुनिया भर के संत विश्व शांति के लिए एक साथ प्रार्थना कर रहे हैं, और इन प्रार्थनाओं में 140 करोड़ भारतीयों की भी प्रार्थनाएं शामिल हैं।

              इसके अलावा मोदी ने कहा, ‘मैं आज इस मंच से एक और महत्वपूर्ण घोषणा कर रहा हूं। भविष्य में, भारत विजिटर्स और इनवेस्टर्स की सुविधा के लिए गेलेफू के पास एक इमिग्रेशन चेक प्वाइंट भी बनाएगा।’

              मोदी बोले- भूटान के साथ मिलकर सैटेलाइट बना रहे

              मोदी ने भूटान-भारत रिश्तों पर कहा कि, ‘हम मिलकर एक सैटेलाइट भी बना रहे हैं। यह भारत और भूटान दोनों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है।’

              मोदी ने आगे कहा कि भारत-भूटान संबंधों की एक बड़ी ताकत हमारे लोगों के बीच आध्यात्मिक संबंध हैं। दो महीने पहले, भारत के राजगीर में रॉयल भूटानी मंदिर का उद्घाटन किया गया था। अब, यह पहल भारत के दूसरे हिस्सों में भी की जा रही है।

              दरअसल, भूटान के लोग वाराणसी में एक भूटानी मंदिर और धर्मशाला चाहते थे। भारत सरकार इसके लिए जमीन उपलब्ध करा रही है। मोदी ने बताया कि, ‘इन मंदिरों के जरिए हम अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत कर रहे हैं। मेरी कामना है कि भारत और भूटान शांति, समृद्धि और साझा प्रगति के पथ पर बढ़ते रहें।’

              भूटान दौरे पर पीएम मोदी का शेड्यूल

              पहला दिन (11 नवंबर)

              1. भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से मिलेंगे।
              2. 1,020 मेगावॉट के पुनातसंगछू-II हाइड्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे।
              3. भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के 70वें जन्मदिन समारोह में शामिल होंगे।
              4. ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल में भाग लेकर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन करेंगे।

              दूसरा दिन (12 नवंबर)

              1. भूटान के प्रधानमंत्री त्सेरिंग टोबगे से मुलाकात करेंगे।
              2. ऊर्जा, रेल, सड़क कनेक्टिविटी और विकास परियोजनाओं पर चर्चा करेंगे।
              3. भारत 10,000 करोड़ रुपए की मदद देगा।
              4. भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के सहयोग पर भी बातचीत होगी।
              भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने दिसंबर 2024 में मोदी से मुलाकात की थी।

              भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने दिसंबर 2024 में मोदी से मुलाकात की थी।

              मोदी को भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला था

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 22 मार्च 2024 को भूटान नरेश ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित किया था। इस तरह वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-भूटानी बने थे।

              यह सम्मान मोदी की भूटान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान दिया गया, जब वे थिम्पू के तेंड्रेलथांग में एक सार्वजनिक समारोह में मौजूद थे।

              यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के भारत-भूटान संबंधों को मजबूत करने और भूटानी लोगों के प्रति उनके योगदान के लिए दिया गया। यह भूटान के सम्मान प्रणाली का शीर्ष पुरस्कार है, जो आजीवन उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

              राजा ने यह सम्मान 17 दिसंबर 2021 को भूटान के 114वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के दौरान घोषित किया था। पीएम मोदी ने इसे 14 करोड़ भारतीयों को समर्पित करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के विशेष बंधन का प्रमाण है।

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 22 मार्च 2024 को भूटान नरेश ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था।

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 22 मार्च 2024 को भूटान नरेश ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था।

              5 वजहों से भारत के लिए खास है भूटान

              भारत के उत्तर पूर्व में बसा भूटान रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक वजहों से भारत के लिए खास महत्व रखना है। भूटान की जनसंख्या सिर्फ 7.5 लाख के आसपास है, लेकिन ये भारत और चीन जैसे दो बड़े देशों के बीच बफर जोन का काम करता है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

              • चीन से लगा हुआ है- भूटान की उत्तरी सीमा चीन से लगती है। अगर भूटान में चीन का प्रभाव बढ़ा, तो भारत की चिकन नेक (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) पर खतरा हो सकता है। यह वो पतली गलियारा है जो भारत के उत्तर-पूर्व को बाकी देश से जोड़ता है।
              • भारत का बफर जोन- भूटान भारत और चीन के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह है। भारत नहीं चाहता कि चीन यहां अपनी सेना या प्रभाव बढ़ाए। चीन ने 2017 में भूटान के डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की थी तो भारत ने अपनी सेना भेजकर उसे रोक दिया था। 73 दिन तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने रहीं थी, आखिर चीन पीछे हट गया था।
              • आर्थिक सहयोग- भूटान की 75% बिजली जलविद्युत (हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट) से आती है। भारत ने यहां पुनातसंगछू, मंगदेछू, ताला जैसी परियोजनाएं बनाईं। भूटान बिजली भारत को बेचता है। इससे भूटान की 80% विदेशी कमाई होती है।
              • सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ता- दोनों देश बौद्ध धर्म से जुड़े हैं। भारत से भगवान बुद्ध के अवशेष (पिपरहवा रिलिक्स) भूटान भेजे गए हैं। भूटान के लोग भारतीय टीवी, फिल्म, खाना, कपड़े पसंद करते हैं। भारतीय बिना पासपोर्ट और वीजा भूटान जा सकते हैं।
              • ग्लोबल सपोर्ट- भूटान UN सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सीट की समर्थन करता है। वहीं, भारत विश्व बैंक और एशिया डेवलपमेंट बैंक (ADB) के जरिए भूटान को अंतरराष्ट्रीय मदद दिलाता है।

              भारत-भूटान के बीच रेल सर्विस शुरू करने की तैयारी

              भारत और भूटान के बीच पहली बार रेल सर्विस शुरू की जा रही है। भारत सरकार ने सितंबर में इसके लिए दो रेल लाइनें बिछाने की घोषणा की थी।

              विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया था कि ये रेल लाइनें असम के कोकराझार से भूटान के गेलेफू और पश्चिम बंगाल के बनरहाट से भूटान के सामत्से तक बिछाई जाएंगी।

              अभी पश्चिम बंगाल में हासीमारा तक ट्रेन थी, अब ये सीधे भूटान के गेलेफू तक जाएगी। 89 किमी लंबे इन दो रेल प्रोजेक्ट्स पर ₹4,033 करोड़ खर्च होंगे।

              यह भूटान को भारत के 1.5 लाख किमी रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, जिससे व्यापार आसान होगा (भूटान का ज्यादातर एक्सपोर्ट-इंपोर्ट भारत के रास्ते होता है)। निर्माण अगले 3 वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि पहले से 2026 का लक्ष्य था।

              भारत की तरफ रेलवे लाइन का खर्च रेल मंत्रालय उठाएगा

              मिसरी ने बताया कि ये दोनों परियोजनाएं भारत और भूटान के बीच रेल संपर्क परियोजनाओं के पहले सेट का हिस्सा हैं। इन परियोजनाओं के लिए पिछले साल पीएम मोदी की भूटान यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे।

              समझौते के मुताबिक भारत सरकार इन दोनों रेल प्रोजेक्ट्स में पूरी मदद करेगी। भारत की तरफ की रेलवे लाइन का खर्च रेल मंत्रालय उठाएगा। भूटान की तरफ का हिस्सा भारत सरकार की मदद से भूटान की 5-वर्षीय योजना के तहत बनेगा। इसमें किसी तीसरे देश का कोई हस्तक्षेप नहीं है।


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