Monday, January 12, 2026

              रायपुर : लखपति दीदी राशोबाई ने मेहनत और समूह सहयोग से कायम की आत्मनिर्भरता की मिसाल

              रायपुर: जहाँ चाह वहां राह इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है,कोंडागांव जिले के विकासखंड फरसगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत बानगांव की रहने वाली श्रीमती राशोबाई मरकाम ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है। राशोबाई आज विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरूकर 01 लाख रूपए से अधिक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं।

              लखपति दीदी राशोबाई ने मेहनत और समूह सहयोग से कायम की आत्मनिर्भरता की मिसाल

              जय माता दी स्व सहायता समूह की सदस्य राशोबाई स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं और घर के कार्यों तक ही सीमित थी। आय के सीमित साधन होने के कारण परिवार की वार्षिक आय केवल 48 हजार रुपये थी, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा करना काफी मुश्किल होता था और परिवार का पालन पोषण बेहतर ढंग से नहीं हो पाता था।

              स्व सहायता समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें समूह के माध्यम से आरएफ अनुदान राशि 15 हजार रुपये और सीआईएफ ऋण राशि 60 हजार रुपये प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने कृषि कार्य के साथ-साथ किराना दुकान संचालन एवं मछली पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। जिला प्रशासन की एनआरएलएम टीम के मार्गदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उक्त आजीविका गतिविधियों के सफल संचालन से आज श्रीमती राशोबाई मरकाम की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 67 हजार रुपये हो गई है। वर्तमान में वे पूर्व की तुलना में दोगुना आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है तथा जीवन स्तर में सुखद बदलाव आया है। आज श्रीमती राशोबाई मरकाम ने अपनी मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा भी बनी है। उन्होंने शासन की योजनाओं से मिली सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। 

              उल्लेखनीय है कि एनआरएलएम ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूहों एवं टीम के सतत प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।


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