मुंबई: शेयर मार्केट में आज यानी 23 जनवरी को गिरावट रही। सेंसेक्स 770 अंक की गिरावट के साथ 81,538 पर बंद हुआ है। यह इस हफ्ते की चौथी बड़ी बिकवाली रही। वहीं निफ्टी में भी करीब 241अंक की गिरावट रही, ये 25,048 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 में गिरावट और 6 में तेजी रही। निफ्टी के बैंकिंग, ऑटो मीडिया और मेटल शेयर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। इस गिरावट से निवेशकों को ₹6 लाख करोड़ का लॉस हुआ पिछले एक हफ्ते में निवेशकों का नुकसान करीब ₹21 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
वहीं आज अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 15% तक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी मार्केट रेगुलेटर की फेडरल कोर्ट से गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को व्यक्तिगत रूप से ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति मांगने को इस गिरावट की वजह माना जा रहा है।
अडाणी ग्रुप पर धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा मामला
अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 15% का कारण मामला अडाणी पर धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा है। 2024 में अमेरिका में अडाणी समेत 8 लोगों पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप लगे थे। अटॉर्नी ऑफिस आरोप पत्र के मुताबिक, अडाणी की कंपनी ने भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोजेक्ट गलत तरीके से हासिल किए थे।
इसके लिए सरकारी अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,029 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का भी आरोप अडाणी पर लगाया गया था। आरोपियों ने अमेरिकी इन्वेस्टर्स और बैंकों से झूठ बोलकर पैसा इकट्ठा किया। 24 अक्टूबर 2024 को न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में यह केस दर्ज हुआ था।
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
- अडानी ग्रुप पर अमेरिकी कानूनी कार्रवाई का डर बाजार गिरने की बड़ी वजह बना। अमेरिकी मार्केट रेगुलेटर (SEC) ने वहां की कोर्ट से इजाजत मांगी है कि वह गौतम अडानी और सागर अडानी को ईमेल के जरिए समन (नोटिस) भेज सके।
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। वे भारत जैसे विकासशील देशों से पैसा निकालकर वापस अमेरिकी बाजार में लगा रहे हैं। इसका कारण यह है कि अमेरिका में अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और वहां ब्याज दरें ऊंची बनी रहने की संभावना है। जब विदेशी निवेशक (FIIs) हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचते हैं, तो बाजार में बड़ी गिरावट आती है।
- ग्लोबल टेंशन और ट्रम्प की नीतियां दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त ट्रेड नीतियां निवेशकों को डरा रही हैं। ट्रम्प की नए देशों पर नए टैक्स (टैरिफ) लगाने की धमकी और ‘ग्रीनलैंड’ जैसे विवादों से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा हो गई है।
- अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (Q3) के लिए भारतीय कंपनियों के जो वित्तीय नतीजे आ रहे हैं, वे निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर, इंडिगो (IndiGo) जैसी बड़ी कंपनी के मुनाफे में 77% की गिरावट आई है। जब बड़ी कंपनियों का मुनाफा घटता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगाता है और वे उन सेक्टरों से पैसा निकालने लगते हैं।
बजट तक जारी रह सकता है उतार-चढ़ाव
बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बना रहेगा। 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले बाजार किसी बड़े ट्रेंड को पकड़ने की कोशिश कर रहा है। तकनीकी जानकारों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट है। अगर बाजार इसके नीचे जाता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। निवेशकों को फिलहाल संभलकर रहने और चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों में ही निवेश की सलाह दी जा रही है।
ग्लोबल मार्केट में तेजी
- एशियाई बाजारों में कोरिया का कोस्पी 0.76% बढ़कर 4,990 पर और जापान का निक्केई इंडेक्स 0.29% चढ़कर 53,846 पर बंद हुआ है।
- हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.45% चढ़कर 26,749 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.33% बढ़कर 4,136 पर बंद हुआ है।
- 22 जनवरी को अमेरिका का डाउ जोन्स 0.63% चढ़कर 49,384 पर बंद हुआ था। वहीं नैस्डेक कंपोजिट में 0.91% और S&P 500 में 0.55% की तेजी रही थी।
22 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने ₹2,549 करोड़ के शेयर्स बेचे
- 21 जनवरी को विदेशी निवेशकों( FIIs) ने 2,549 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। वहीं घरेलू निवेशकों (DII) ने 4,222 करोड़ रुपए के शेयर्स खरीदे हैं।
- दिसंबर 2025 में FIIs ने कुल ₹34,350 करोड़ के शेयर्स बेचे थे। इस दौरान बाजार को संभाल रहे DIIs ने ₹79,620 करोड़ के शेयर खरीदे थे।
कल बाजार में रही थी तेजी
इससे पहले कल यानी 22 जनवरी को शेयर बाजार में तेजी रही थी। सेंसेक्स सेंसेक्स 398 अंक चढ़कर 82,307 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 132 अंक की तेजी रही थी। ये 25,290 के स्तर के पर बंद हुआ था।

(Bureau Chief, Korba)





