नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 130वें एपिसोड में मतदाता दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है। लोगों से नए वोटर्स के लिए मिठाई बांटने की अपील की।
पीएम ने सोशल मीडिया पर चल रहे 2016 की तस्वीरें शेयर करने के ट्रेंड पर बात की। उन्होंने अपनी सरकार के काम पर बात करते हुए कहा कि भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको सिस्टम बन चुका है। ये स्टार्टअप लीक से हटके हैं, जिनके बारे में 10 साल पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
उन्होंने कहा कि मैं अपने उन सभी युवा साथियों को सैल्यूट करता हूं, जो किसी न किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।
पीएम ने भारतीय प्रडोक्ट्स को लेकर कहा कि हम सभी का एक ही मंत्र हो क्वालिटी क्वालिटी और क्वालिटी। इंडियन प्रोडक्ट का मतलब बन जाए क्वालिटी। हम संकल्प लें कि क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होगा।
मतादाता दिवस को लेकर कहा- नए वोटर को बधाई दें
पीएम ने कहा- जैसे हम जन्मदिन मनाते हैं उसी तरह, जब भी कोई युवा पहली बार वोटर बनता है, तो पूरे मोहल्ले, गांव या शहर को एक साथ आकर उसे बधाई देनी चाहिए और मिठाई बांटनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे वोटिंग के बारे में जागरूकता बढ़ेगी और यह भावना मजबूत होगी कि वोटर होना कितना जरूरी है। इससे पहले पीएम ने X पर वोटर्स डे से जुड़ा एक लेटर भी शेयर किया।
स्टार्टप इंडिया पर कहा- हर सेक्टर में काम हो रहा
पीएम ने स्टार्टप इंडिया पर कहा कि AI, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी… आप नाम लीजिए और आपको कोई न कोई भारतीय स्टार्टअप उस सेक्टर में काम करता हुआ मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि मैं अपने उन सभी युवा दोस्तों को सलाम करता हूं जो किसी न किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।

तमसा नदी का जिक्र किया
पीएम ने उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ की तमसा नदी के लिए कहा कि लोगों ने तमसा नदी को नया जीवन दिया है। तमसा सिर्फ एक नदी नहीं है, यह हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की एक जीवित धारा है। यह नदी, जो अयोध्या से गुजरती है और गंगा में मिल जाती है, कभी इस क्षेत्र के लोगों के जीवन का आधार थी। हालांकि, प्रदूषण के कारण इसका लगातार प्रवाह बाधित हो गया था।
इसी तरह की जनभागीदारी की कोशिश आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में भी देखी गई है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो गंभीर सूखे से जूझ रहा है। यहां की मिट्टी लाल और रेतीली है, जिस वजह से लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।
इस कोशिश के तहत, 10 से ज्यादा जलाशयों को फिर से जिंदा किया गया है। ये जलाशय अब पानी से भर रहे हैं। साथ ही, 7,000 से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। इसका मतलब है कि पानी बचाने के साथ-साथ अनंतपुर में हरियाली भी बढ़ी है।

पर्यावरण संरक्षण पर पीएम ने लोगों की सराहना की
पीएम ने कहा कि जब पर्यावरण सरंक्षण की बात होती है, तो अक्सर हमारे मन में बड़ी योजनाएं, बड़े अभियान और बड़े-बड़े संगठन की बातें आती हैं। लेकिन कई बार बदलाव की शुरुआत बहुत साधारण तरीके से होती है।
उन्होंने बेनॉय दास के लिए कहा कि उन्होंने हजारों पेड़ लगाए हैं, कई बार पौधे खरीदने से लेकर उन्हें लगाने और देख-भाल करने का सारा खर्च खुद ने उठाया है। वहीं, मध्य प्रदेश में पन्ना जिले के जगदीश प्रसाद अहिरवार के प्रयासों की भी सराहना की।
पीएम ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए भी जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये बताता है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब लोग ज्यादा जागरूक हैं, और किसी-ना-किसी रूप में अपना योगदान देना चाहते हैं।

पीएम ने और क्या कहा…
- आज भारतीय संस्कृति और त्योहारों की पहचान पूरी दुनिया में बन रही है। विदेशों में भी भारत के त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं।
- मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। वहां तमिल के साथ-साथ दूसरी भारतीय भाषाओं पर भी ध्यान दिया जाता है।
- जनभागीदारी और सामूहिकता देश की सबसे बड़ी ताकत है। पहले मंदिरों में भजन सुनने की परंपरा रही है। हर दौर में भक्ति को समय के अनुसार अपनाया गया है। आज के युवा भक्ति को अपने अनुभव और जीवनशैली से जोड़ रहे हैं।
- गुजरात में बेचराजी के चंदनकी गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है, अगर मैं आपसे कहूं कि यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते तो आपको हैरत होगी। इसकी वजह गांव का शानदार कम्यूनिटी किचन है।
- अरुणाचल वो धरती है जहां देश में सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुंचती है। यहां लोग ‘जय हिन्द’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। यहां ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी।
- असम के नागांव में वहां की पुरानी गलियों से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को मिलकर साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उनके साथ और लोग जुड़ते गए, इस तरह एक ऐसी टीम तैयार हो गई, जिसने गलियों से बहुत सारा कचरा हटा दिया।

(Bureau Chief, Korba)





