BIG NEWS: फाइटर जेट बेचकर कर्जा चुका रहा पाकिस्तान; सउदी अरब-लीबिया जैसे 8 मुस्लिम देशों से डीलिंग की

              इस्लामाबाद: पाकिस्तान अपना कर्जा चुकाने के लिए चीन के फाइटर जेट्स की अन्य देशों के साथ डीलिंग कर रहा है। उसने नाइजीरिया, अजरबैजान, लीबिया, सऊदी अरब, मोरक्को, इंडोनेशिया, इथियोपिया और सूडान जैसे देशों को ये जेट्स बेचे हैं।

              जिन देशों को जेट्स दिए गए हैं उनमें से 8 मुस्लिम देश हैं। इस्लामाबाद के कामरा में चीन सरकार का चेंडु एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (सीएसी) और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्पलेक्स (पीएसी) जॉइंट वेंचर प्रोडक्शन कर रहे हैं।

              ये प्रोडक्शन यूनिट पूरी तरह से चीन ही ऑपरेट कर रहा है। चीन के लगभग 500 एयरोनॉटिकल इंजीनियर यहां पर नियुक्त हैं। कामरा यूनिट से हर साल लगभग 50 जे सीरीज फाइटर जेट का प्रोडक्शन किया जा रहा है।

              सऊदी को जेट बेच पाक ने 18 हजार करोड़ चुकाए

              पाकिस्तान ने सऊदी अरब को चीन के जेट बेच कर 18 हजार करोड़ रुपए का कर्ज भी चुका दिया। इससे बार्टर डील कहा जा रहा है। पाक पर सऊदी का लगभग 70 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है।

              चीन के फाइटर जेट बेचने को ऑलवेज ब्रदर डील का नाम दिया गया है। लगभग 200 करोड़ रुपए के एक जे सीरीज के फाइटर जेट को बेचने का लगभग 80% से ज्यादा हिस्सा चीन के हिस्से में जाता है।

              पाक के नाम बैटल रेडी ब्रांडिंग कर रहा चीन

              वर्ल्ड आर्म्स मार्केट में बैटल रेडी ब्रांडिंग बेहद जरूरी होती है। चीन ने 47 साल से किसी देश के साथ युद्ध नहीं लड़ा है। ऐसे में पाक चीन के हथियारों की बैटल रेडीनेस खरीदारों को बता रहा है। पाक इसके लिए भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ इन हथियारों के इस्तेमाल को पेश करता है।

              तुर्किये की कामीकाजी ड्रोन की यूनिट भी पाक में

              पाक ने चीन के अलावा तुर्किये के साथ भी हथियार बनाने के प्लान पर काम शुरू कर दिया है। तुर्किये के कामीकाजी (आत्मघाती) ड्रोन की संयुक्त यूनिट अगले साल लाहौर के पास लगाने का समझौता हुआ है। पाकिस्तान ने हर साल लगभग 200 ड्रोन प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा है। ये एक्सपोर्ट भी किए जाएंगे।

              शुक्रवार को पाक पीएम बोले- कर्ज मांगने में अब शर्म आती है

              पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज ने विदेशी कर्ज पर देश की बढ़ती निर्भरता को लेकर नाराजगी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, शहबाज ने शुक्रवार को माना कि देश की बदहाल आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें बार‑बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा। शहबाज ने कहा- कर्ज लेना हमारे आत्मसम्मान पर बहुत बड़ा बोझ है। कई बार हमें कॉम्प्रोमाइज करना पड़ता है। कई बार हम उनकी शर्तों को ‘ना’ भी नहीं कह पाते।


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