Saturday, February 7, 2026

            BREAKING: युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री बने, लोधी दिखो- नेमचा किपगेन डिप्टी सीएम बने, राज्य में 356 दिन बाद राष्ट्रपति शासन हटा

            नई दिल्ली: भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री बने हैं। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने बुधवार शाम को इम्फाल स्थित लोकभवन में खेमचंद को शपथ दिलाई। खेमचंद मैतेई समुदाय से आते हैं।

            उनके साथ ही नगा समुदाय से आने वाले लोधी दिखो ने डिप्टी सीएम की शपथ ली। वे नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक हैं। वहीं, कुकी समुदाय से आने वालीं नेमचा किपगेन राज्य की पहली डिप्टी सीएम बनीं। भाजपा नेता नेमचा ने दिल्ली के मणिपुर भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शपथ लीं।

            राज्य में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था

            आज ही राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राज्य में 356 दिन से लगा राष्ट्रपति शासन हटाया है। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा के कारण 9 फरवरी 2025 को तत्कालीन CM एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया था। इसके 4 दिन बाद, 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।

            नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दिखो ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। उनकी पार्टी NDA में शामिल है।

            नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दिखो ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। उनकी पार्टी NDA में शामिल है।

            भाजपा विधायक नेमचा किपगेन ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है। वे राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम हैं।

            भाजपा विधायक नेमचा किपगेन ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है। वे राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम हैं।

            बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लगी

            3 फरवरी को दिल्ली में मणिपुर भाजपा के विधायक दल की बैठक हुई थी। इसमें भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया था। 4 फरवरी को NDA के घटक दलों के विधायकों की बैठक में सीएम और डिप्टी सीएम के नामों पर मुहर लगी।

            खेमचंद पूर्व सीएम बीरेन सिंह के करीबी माने जाते हैं। वहीं, राज्य के गृह मंत्री के लिए कोंथौजम गोविंदास सिंह का नाम चर्चा में है।

            दिल्ली भाजपा कार्यालय में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया था।

            दिल्ली भाजपा कार्यालय में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया था।

            युमनाम खेमचंद बीरेन सिंह के नजदीकी, लेकिन कट्‌टर मैतेई नहीं

            युमनाम खेमचंद सिंग्जामेई क्षेत्र (इंफाल वेस्ट) से भाजपा विधायक हैं। 2017-2022 तक मणिपुर विधानसभा स्पीकर रहे। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की दूसरी सरकार में मंत्री रहे।

            वे मैतेई समुदाय से आते हैं, जो मणिपुर के घाटी क्षेत्र में बहुसंख्यक हैं। बीरेन सिंह के साथ नजदीकी भी हैं। हाल के महीनों में वे शांति प्रयासों में सक्रिय रहे हैं।

            मई 2023 हिंसा के बाद दिसंबर 2025 में कुकी बहुल इलाकों और रिलीफ कैंप का दौरा करने वाले वे पहले मैतेई नेता हैं। बीरेन सिंह की तुलना में मध्यमार्गी माने जाते हैं। यही बात इन्हें कट्टर मैतेई लाइन से अलग करती है।

            डिप्टी CM बनने वाली नेम्चा बीरेन सरकार में मंत्री रह चुकीं

            नई सरकार में कुकी-जो समुदाय को संतुष्ट करने के लिए नेम्चा किप्गेन काे​ उपमुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। नेम्चा 2017 और 2022 में कुकी बहुल कांगपोकपी से भाजपा की विधायक हैं। बीरेन सिंह के पहले कार्यकाल (2017-2020) में उन्होंने सामाजिक कल्याण एवं सहकारिता मंत्री का पद संभाला।

            बीरेन सिंह के दूसरे कार्यकाल में वे वाणिज्य एवं उद्योग, वस्त्र एवं सहकारिता विभाग की कैबिनेट मंत्री हैं। मैतेई-कुकी जाति हिंसा के दौरान इम्फाल में उनका सरकारी आवास जला दिया गया था। वे उन 10 कुकी-जो विधायकों में हैं, जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग प्रशासन की मांग की थी।

            नेम्चा किपगेन पूर्व CM बीरेन सिंह के दो कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं।

            नेम्चा किपगेन पूर्व CM बीरेन सिंह के दो कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं।

            मणिपुर विधानसभा में BJP के अभी 37 विधायक

            मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के 37 विधायक हैं। सरकार का कार्यकाल 2027 तक है। हालांकि, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद विधानसभा निलंबित कर दी गई थी। 2022 के चुनाव में 32 भाजपा विधायक जीते थे।

            JDU ने छह सीटें जीती थीं, जिनमें से पांच विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए। अन्य विधायकों में से छह NPP से, पांच NPF से, पांच कांग्रेस से, दो कुकी पीपुल्स अलायंस से, एक जनता दल (यूनाइटेड) से और तीन निर्दलीय हैं। एक मौजूदा विधायक के निधन के बाद एक सीट खाली है।

            कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा की 3 मुख्य कारण

            1. ST (अनुसूचित जनजाति) दर्जे की मांग: 14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए ST का दर्जा देने पर सिफारिश भेजने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद कुकी समुदाय में आक्रोश फैला और हिंसा भड़की।

            कुकी पहले से ST श्रेणी में है। उन्हें डर है कि अगर मैतेई को भी ST का दर्जा मिला, तो वे पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीद सकेंगे और इससे उनका सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

            मणिपुर के इंफाल घाटी में लगभग 10% भूमि क्षेत्र है, जहां मैतेई बहुसंख्यक रहते हैं। बाकी 90% पहाड़ी इलाका कुकी और नगा समुदायों का है। यह क्षेत्र आदिवासी जमीन (Tribal Lands) के अंतर्गत आता है और मैतेई यहां जमीन नहीं खरीद सकते।

            2. अलग कुकी प्रशासन की मांग: कुकी समुदाय ‘कुकीलैंड’ या ‘जूमलैंड’ नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं । मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इस मांग को राज्य की अखंडता के लिए खतरा मानती है।

            3. कुकी पर ड्रग्स तस्करी का आरोप: कुकी समुदाय पर म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगता रहा है। सरकार ने भी कुकी पर अवैध अफीम की खेती की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया, जिससे सरकार के प्रति उनका अविश्वास और बढ़ गया।

            कुकी का मानना है कि उनके समुदाय को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। कुकी समुदाय का आरोप है कि मणिपुर सरकार (पूर्व भाजपा सरकार) मैतेई का पक्ष लेती है। वे सुरक्षाबलों और पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हैं।


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