बिहान से जुड़कर कर बनीं कार और ट्रेक्टर की मालकिन
रायपुर (BCC NEWS 24): राजकुमारी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर स्वावलंबन का एक नया इतिहास रचा है। बस्तर के विकासखंड दरभा अंतर्गत ग्राम लेंड्रा की निवासी राजकुमारी कश्यप की जीवन यात्रा संघर्ष और आत्मविश्वास का एक जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले राजकुमारी का जीवन अनिश्चितताओं से भरा था। उनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था और वे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेतों में मजदूरी करने या जंगलों से प्राप्त वनोपज एवं अन्य संसाधनों पर निर्भर थीं। उस दौर में वे न केवल गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं।

राजकुमारी के जीवन में बदलाव की शुरुआत बिहान योजना के माध्यम से हुई, जब वे वर्ष 2015 में सूरजमुखी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से मिलने वाले प्रशिक्षणों ने न केवल उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा जगाई, बल्कि उन्हें अपनी समस्याओं के खिलाफ मुखर होना भी सिखाया। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने पशुपालन, चूजा ब्रुडिंग इकाई तथा राशन दुकान के संचालन जैसे विविध व्यवसायों को अपनी आजीविका के रूप में अपनाया। आज वे एक कुशल पशुपालन उद्यमी के रूप में न केवल अपने ब्लॉक, बल्कि अन्य विकासखंडों में भी चूजों की सप्लाई और पशुओं के टीकाकरण का कार्य सफलतापूर्वक कर रही हैं।
राजकुमारी दीदी की यह उद्यमशीलता उनके जीवन में एक बड़ी क्रांति लेकर आई है। कभी दूसरों के घर मजदूरी करने वाली राजकुमारी की आय 11 वर्षों के भीतर साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपए तक पहुँच गई है, जिससे उनके परिवार का जीवन स्तर पूरी तरह बदल गया है। कभी मिट्टी के घर में रहने वाली राजकुमारी दीदी ने अब अपना पक्का घर बना लिया है और उनके पास खेती के लिए ट्रैक्टर, दो मोटरसाइकिल तथा एक चार पहिया कार भी है। आर्थिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई और अपनी सामाजिक पहचान भी बनाई। वर्तमान में वे संकुल संगठन की अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। अब उनका लक्ष्य अपनी खुद की हैचरी (मदर यूनिट) स्थापित करना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार दे सकें।

(Bureau Chief, Korba)




