BIG NEWS: अमेरिका ने एच-1बी वीजा देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया, अब सैलरी के आधार पर होगा चयन; 1 अप्रैल से नया फार्म I-129 लागू होगा

              नई दिल्ली: अमेरिका ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय वेतन के आधार पर होगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 का नया सिस्टम बनाया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया जाएगा।

              कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल याचिका में नौकरी से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे पहले की तुलना में ज्यादा अनुभवी और हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

              नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा जाएगा। जिस पद का वेतन स्तर जितना ऊंचा होगा, चयन प्रक्रिया में उसे उतने अधिक मौके मिलेंगे। मसलन, लेवल-4 के उम्मीदवार को चार मौके मिलेंगे, जबकि लेवल-1 को सिर्फ एक मौका मिलेगा।

              फॉर्म I-129 का उपयोग अस्थायी कामगारों को अमेरिका बुलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका का श्रम विभाग हर पेशे और शहर के लिए एक मानक वेतन तय करता है। उसी के आधार पर नौकरी को लेवल-1 से लेवल-4 में रखा जाता है।

              लेवलसैलरीलॉटरीनई प्रक्रिया
              एंट्री₹69–83 लाख29.59%15.29%
              मिड₹83 लाख – ₹1 करोड़29.59%30.58%
              एक्सपर्ट₹1 – ₹1.24 करोड़29.59%45.87%
              टीम लीडर₹1.24 करोड़+29.59%61.16%

              70% एच-1 बी वीजा भारतीयों को मिलता है

              • ट्रम्प के आदेश का क्या असर- भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि हर साल कुल जारी किए जाने वाले एच-1बी वीजा में से 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को जारी किए जाते हैं।
              • एच-1 बी वीजा की फीस कितनी- पहले फीस लगभग 9 हजार डॉलर यानी करीब 8 लाख 30 हजार रुपए थी, लेकिन सितंबर 2025 में ट्रम्प ने इसे बढ़ाकर 1 लाथ डॉलर यानी लगभग 90 लाख रुपए कर दिया।
              • इस वीजा की अवधि कितनी है- 3-3 साल के लिए दो बार जारी होता है। कुल अवधि 6 साल के बाद आवेदक चाहे तो ग्रीन कार्ड यानी नागरिकता से पहले की स्टेज के लिए आवेदन कर सकता है।

              एच-1 बी पर ट्रम्प की कभी हां, कभी ना

              ट्रम्प का एच-1 बी वीजा पर 9 साल में कभी हां, कभी ना वाला रवैया रहा है। पहले कार्यकाल में 2016 में ट्रम्प ने इस वीजा को अमेरिकी हितों के खिलाफ कहा था। 2019 में इस वीजा का एक्सटेंशन सस्पेंड किया। पिछले महीने ही यू-टर्न लेते हुए कहा- हमें टैलेंट की जरूरत है।

              गोल्ड कार्ड में हमेशा रहने का अधिकार मिलेगा

              ट्रम्प ने H-1B में बदलाव के अलावा 3 नए तरह के वीजा कार्ड लॉन्च किए थे। ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट​​​​​ गोल्ड कार्ड’ जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड (8.8 करोड़ कीमत) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा।

              टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं

              भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं।

              कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा।


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