BIG NEWS: अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़ी टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के लगाए टैरिफ को अवैध ठहराया था, अब ब्याज समेत 90 दिन में पैसा वापस मिलेगा, ₹13.8 लाख करोड़ लौटाने होंगे

              वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराने के बाद रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अमेरिकी कंपनियां सोमवार से नए ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकती हैं। इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा टैरिफ रिफंड माना जा रहा है, जिसमें 166 अरब डॉलर (करीब 13.8 लाख करोड़ रुपए) लौटाए जाने हैं।

              रिफंड लौटाने का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू हुआ है। कोर्ट ने कहा था कि ट्रम्प प्रशासन ने आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर टैरिफ लगाए थे। इसके बाद कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने इंपोर्टर्स को उनकी जमा राशि और ब्याज लौटाने के निर्देश दिए थे।

              इस फैसले के तहत करीब 3.3 लाख इंपोर्टर्स को राहत मिलेगी, जिन्होंने पिछले साल कार पार्ट्स से लेकर स्मार्टफोन तक पर भारी टैक्स चुकाया था

              CAPE पोर्टल से होगा आवेदन

              US कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने कंसोलिडेटेड एडमि निस्ट्रेशन एंड प्रॉसेसिंग ऑफ एंट्रीस (CAPE) नाम का नया पोर्टल लॉन्च किया है। यह ACE (Automated Commercial Environment) सिस्टम का हिस्सा है। इसके जरिए इंपोर्टर्स “CAPE डिक्लेरेशन” दाखिल कर अपने क्लेम सबमिट कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने का दावा किया गया है।

              60-90 दिनों में मिलेगा पैसा

              रिफंड पाने के लिए “इंपोर्टर ऑफ रिकॉर्ड” और अधिकृत कस्टम ब्रोकर्स को ACE पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा और बैंक अकाउंट डिटेल्स देनी होंगी। CBP के मुताबिक, सही और पूरी जानकारी वाले आवेदन पर 60-90 दिनों में भुगतान किया जा सकता है। दस्तावेजों में कमी या जांच की जरूरत होने पर देरी संभव है।

              पहले चरण में सीमित इंपोर्टर्स को राहत

              CBP ने साफ किया है कि पहले चरण में सभी इंपोर्टर्स को रिफंड नहीं मिलेगा। फिलहाल केवल “अनलिक्विडेटेड एंट्रीज” (जिनका टैक्स आकलन अभी पूरा नहीं हुआ) और 80 दिनों के भीतर की एंट्रीज को शामिल किया गया है। बाकी मामलों को आगे के चरणों में लिया जाएगा।

              56 हजार इंपोर्टर्स ने रजिस्ट्रेशन कराए

              कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, करीब 3.3 लाख इंपोर्टर्स ने कुल 166 अरब डॉलर का टैरिफ भुगतान किया था। 9 अप्रैल तक इनमें से केवल 56,500 इंपोर्टर्स ने ही इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में रजिस्ट्रेशन कराया है, जो रिफंड पाने के लिए जरूरी है।

              उपभोक्ताओं को कितना फायदा?

              न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के मुताबिक, टैरिफ का लगभग 90% बोझ कंपनियों और उपभोक्ताओं ने मिलकर उठाया था। कुछ कंपनियों जैसे लॉजिस्टिक्स और रिटेल सेक्टर ने ग्राहकों को राहत देने का संकेत दिया है, लेकिन आम उपभोक्ताओं तक इसका कितना लाभ पहुंचेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

              कानूनी लड़ाई अभी जारी

              टैरिफ को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कॉस्टको जैसी कंपनियों ने पहले ही टैरिफ के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ट्रेड कोर्ट ने संकेत दिया है कि कई मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए जोड़ा जाएगा। वहीं, सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकती है, जिससे प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।

              10% ग्लोबल टैरिफ पर भी उठे सवाल

              इस बीच, कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जजों ने ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। 24 राज्यों (ज्यादातर डेमोक्रेट शासित) और छोटे व्यवसायों ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या केवल व्यापार घाटा इतना बड़ा कदम उठाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।


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