BIG NEWS: ईरान ने कहा- ट्रम्प का दबाव सहन नहीं करेंगे, अमेरिका अब दूसरे देशों पर फैसले थोपने की स्थिति में नहीं; दावा- ईरान होर्मुज खोलने को तैयार

              तेहरान/वॉशिंगटन डीसी: ईरान ने मंगलवार को कहा कि अब अमेरिका उस स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशों को बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए। ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलाएई-निक ने सरकारी टीवी से कहा कि वे ट्रम्प का दबाव नहीं सहन करेंगे।

              उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी गलत मांगों को छोड़ना ही होगा।यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका, होर्मुज को खोलने से जुड़े ईरान के नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

              अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच फिलहाल युद्धविराम लागू है, लेकिन इस संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने के लिए जो बातचीत चल रही है, उसमें अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

              इस बीच ईरान पहली बार होर्मुज खोलने को तैयार हो गया है। ईरान ने अमेरिका से समुद्री नाकेबंदी हटाने की भी अपील की है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।

              रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को बातचीत के लिए रविवार को एक नया प्रस्ताव दिया था।

              इसमें मुख्य रूप से 3 शर्तें थीं-

              1. अमेरिका-इजराइल के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो और आगे हमला न करने की गारंटी मिले

              2. फिर अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी हटे, होर्मुज खुले और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो

              3. सबसे आखिर में परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे विवादित मुद्दों पर बात हो

              हालांकि ट्रम्प इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं हैं। CNN के मुताबिक ट्रम्प सरकार का मानना है कि अगर बिना परमाणु कार्यक्रम का मामला सुलझाए बिना होर्मुज खोला, तो बातचीत में अमेरिकी पक्ष कमजोर हो जाएगा। इसलिए दोनों का हल एक साथ ही निकाला जाना चाहिए।

              ओमान के मुसंदम तट के पास सोमवार को होर्मुज में कई जहाज खड़े दिखाई दिए। युद्ध शुरू होने के बाद से इनमें से कई जहाज फंसे हुए हैं।

              ओमान के मुसंदम तट के पास सोमवार को होर्मुज में कई जहाज खड़े दिखाई दिए। युद्ध शुरू होने के बाद से इनमें से कई जहाज फंसे हुए हैं।

              ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच

              ट्रम्प ने दो दिन में दूसरी बार ईरान का प्रस्ताव ठुकराया है। दरअसल, पिछले कई हफ्तों से ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के जरिए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।

              अमेरिका की मांग थी कि ईरान 20 साल तक अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे और अपने पास मौजूद 440 किलो समृद्ध यूरेनियम सौंप दे। ईरान ने इन मांगों को बहुत ज्यादा और अनुचित बताते हुए मानने से इनकार कर दिया था।

              ईरान का पहला प्रस्ताव (जो खारिज हुआ)

              • 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोका जाएगा
              • उसके बाद 5 साल तक बहुत कम स्तर पर, सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए संवर्धन होगा
              • अपने यूरेनियम भंडार को कम किया जाएगा
              • आधा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय निगरानी में ईरान में रहेगा
              • बाकी आधा रूस को दे दिया जाएगा

              ईरान ने 26 अप्रैल को यह प्रस्ताव दिया था, जिसे ट्रम्प ने ठुकरा दिया था। इसके बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए कहा कि अभी कठिन मुद्दों को अलग रखा जाए। पहले युद्ध खत्म करने से जुड़े कदम उठाए जाएं, जैसे होर्मुज को खोलना और नाकेबंदी हटाना, और बाद में परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर बातचीत की जाए, जिसे 27 अप्रैल को एक बार फिर से ट्रम्प ने ठुकरा दिया।

              पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…

              • तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार सुबह रूस की अपनी यात्रा खत्म करने के बाद इस्लामाबाद पहुंचे। पिछले 48 घंटों में यह उनका तीसरा पाकिस्तान दौरा है।
              • पुतिन से मिले ईरानी विदेश मंत्री- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक रिश्तों और मौजूदा हालात पर चर्चा हुई।
              • रूस ने US-इजराइल हमलों की आलोचना की- रूस ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के दूरगामी असर होंगे। मॉस्को ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर कदम बताया।
              • फ्रांस बोला- ईरान नरम पड़े तभी निकलेगा हल- फ्रांस ने कहा है कि अगर जंग खत्म करनी है तो ईरान को बड़े समझौते करने होंगे और अपने रुख में बदलाव लाना होगा।
              • जर्मनी ने अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए- जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि ईरान के सामने अमेरिका कमजोर दिख रहा है। उन्होंने वॉशिंगटन की रणनीति पर सवाल उठाए।

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