रायपुर : बिहान योजना से बदली महिलाओं की तस्वीर : संगीता बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

              समूह से जुड़कर शुरू किया पशुपालन, आज बन चुकी हैं ‘लखपति दीदी

              स्वरोजगार से बढ़ी आय, गांव की महिलाओं को भी दे रहीं प्रेरणा

              रायपुर (BCC NEWS 24): छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। बलरामपुर जिले के ग्राम बड़कीमहरी की रहने वाली श्रीमती संगीता यादव इसकी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई हैं। कभी घर और खेत तक सीमित रहने वाली संगीता आज आत्मनिर्भर महिला और सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

              श्रीमती संगीता यादव बिहान योजना अंतर्गत मां भवानी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के विभिन्न पहलुओं की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने गांव में पशु सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया और ग्रामीणों को पशुओं की देखभाल एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने लगीं।

              श्रीमती संगीता ने ग्राम संगठन से ऋण लेकर भैंस पालन की शुरुआत की। दूध विक्रय से उन्हें नियमित आय मिलने लगी। इसके साथ ही उन्होंने बकरी पालन भी शुरू किया, जिससे अतिरिक्त आय होने लगी। मेहनत और लगन के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत होती गई। बाद में उन्होंने ऋण लेकर दो ट्रैक्टर भी खरीदे, जिनका उपयोग उनके पति खेती-किसानी और ट्रैक्टर संचालन कार्य में कर रहे हैं। परिवार ने नियमित किस्तों के माध्यम से ऋण का भुगतान भी पूरा कर लिया है।

              श्रीमती संगीता यादव बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास बढ़ा है। अब गांव के लोग उनसे सलाह लेने आते हैं और वे अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। गांव की कई महिलाएं अब समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बिहान योजना और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ग्रामीण महिलाओं को केवल रोजगार का अवसर ही नहीं दे रहे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मान और नई पहचान भी प्रदान कर रहे हैं। श्रीमती संगीता यादव की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।


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