कोलकाता: सुवेंदु सरकार ने पश्चिम बंगाल में SIR कराने वाले चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया है।
मनोज की देखरेख में विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल में वोटर लिस्ट में विशेष गहन संशोधन (SIR) कराया गया था। इसमें मतदाता सूची से लगभग 91 लाख वोटर्स के नाम हट गए थे।
इसके अलावा रिटायर्ड IAS अधिकारी सुब्रत गुप्ता को भी मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है। सुब्रत को बंगाल में SIR के दौरान ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया था।
कांग्रेस बोली- चुनाव आयोग ने चालाकी से भाजपा को फायदा पहुंचाया

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर लिखा, ये नियुक्तियां ECI और BJP के बीच खुली मिलीभगत और सांठगांठ को दर्शाती हैं। अब तो इस मिलीभगत को छिपाने की कोई कोशिश भी नहीं की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये नियुक्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि ECI निष्पक्ष नहीं था और उसने पूरी तरह से BJP को फायदा पहुंचाने के मकसद से काम किया।
रमेश ने कहा, चुनाव के दौरान 27 लाख लोगों को वोट करने से रोक दिया गया। ECI ने BJP को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए इस काम को बड़ी ही चालाकी से अंजाम दिया।
टीएमसी बोली- अब भी कोई मानता है कि चुनाव निष्पक्ष हुए
TMC नेता साकेत गोखले ने इस कदम को ‘बेहद बेशर्मी भरा बताया। वहीं टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने तंज वाले लहजे में इसे एक ‘संयोग’ कहा। X पर अपनी पोस्ट में, गोखले ने कहा कि इस कदम से पता चलता है कि BJP और ECI “चुनाव चुराने के मामले में खुलेआम सामने आ रहे हैं” और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अदालतें “अंधी हैं या इसमें मिलीभगत है”।

तृणमूल की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने X पर पोस्ट किया: “तथाकथित ‘न्यूट्रल अंपायर’ को बंगाल में BJP सरकार के शीर्ष नौकरशाह के पद से नवाजा गया है। क्या अब भी कोई गंभीरता से मानता है कि बंगाल चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष थे? यह बेहद शर्मनाक कदम है।
बंगाल सरकार में नियुक्त दोनों अधिकारियों के बारे में जानिए
मनोज अग्रवाल पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे IIT कानपुर के पूर्व छात्र भी हैं। वे मौजूदा मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला की जगह लेंगे। हालांकि अग्रवाल का शुरुआती कार्यकाल छोटा होगा। वे जुलाई में रिटायर होने वाले हैं।
1990 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी सुब्रत गुप्ता ने चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया के लिए ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया। 9 मई को उन्हें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का सलाहकार नियुक्त किया गया। चुनाव के दौरान तृणमूल ने SIR प्रक्रिया और चुनाव के संचालन को लेकर इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं।

(Bureau Chief, Korba)




