नई दिल्ली: जस्टिस स्वर्णकांता ने शराब नीति केस छोड़ा, बोलीं- सोशल मीडिया पर मुझे निशाना बनाया, केजरीवाल समेत AAP नेताओं पर अवमानना की कार्यवाही करूंगी

              नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने गुरुवार को शराब नीति घोटाला मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।

              स्वर्णकांता शर्मा ने कहा- जो जज अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हैं वो मुख्य केस नहीं सुन सकते। मैं शराब नीति केस को चीफ जस्टिस के सामने लिस्ट करूंगी ताकि केस की सुनवाई कोई दूसरा जज कर सके।

              स्वर्णकांता शर्मा केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और विनय मिश्रा पर कंटेम्प्ट की कार्यवाही शुरू करेंगी।

              अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाला केस से जस्टिस शर्मा को हटाने की मांग की थी। उनका आरोप था कि जस्टिस शर्मा RSS के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

              जस्टिस स्वर्णकांता के आदेश की 5 बातें…

              1. फैसले से असहमति थी तो सुप्रीम कोर्ट जाते

              अगर किसी पक्ष को अदालत के आदेश पर आपत्ति थी, तो उसे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था। इसके बजाय सोशल मीडिया के जरिए न्यायपालिका को निशाना बनाया गया और अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए।

              2. मुझे डराने की कोशिश हुई, लेकिन मैं नहीं डरूंगी

              न्यायाधीशों का सम्मान उनकी कुर्सी से नहीं, बल्कि संविधान के मुताबिक निर्भीक फैसले देने से होता है। मुझे डराने की कोशिश हुई, लेकिन मैं नहीं डरूंगी।

              3. आलोचना और अवमानना में फर्क होता है

              किसी फैसले की आलोचना करना अवमानना नहीं है, लेकिन सुनियोजित तरीके से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर हमला करना आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है।

              4. एडिटेड वीडियो से छवि खराब करने की कोशिश की

              वाराणसी यूनिवर्सिटी में दिए गए मेरे व्याख्यान का 59 सेकंड का एडिटेड वीडियो वायरल किया गया। भगवान शिव और वाराणसी के संदर्भ को राजनीतिक रंग देकर पेश किया गया, जिससे अदालत की छवि खराब करने की कोशिश हुई।

              5. कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं

              सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश थी। झूठ को हजार बार बोलने से वह सच नहीं बन जाता और कोई भी व्यक्ति, चाहे कितना प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।

              27 अप्रैल: केजरीवाल बोले- हाईकोर्ट में पेश नहीं होऊंगा

              केजरीवाल ने 27 अप्रैल को वीडियो जारी कर कहा था कि शराब नीति घोटाला मामले में हाईकोर्ट में पेश नहीं होंगे।

              केजरीवाल ने 27 अप्रैल को वीडियो जारी कर कहा था कि शराब नीति घोटाला मामले में हाईकोर्ट में पेश नहीं होंगे।

              अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर कहा था- ‘शराब नीति घोटाला मामले में मैं हाईकोर्ट में न खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी तरफ से दलीलें रखेगा। हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

              केजरीवाल ने आरोप लगाया था- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दोनों बच्चों को केस देते हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच करीब 5904 केस मिले। अगर जज के बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तय कर रहे हैं तो क्या जज साहिबा उनके खिलाफ फैसला सुना पाएंगी।

              20 अप्रैल: AAP नेताओं ने जज से हटने की मांग की थी

              दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति केस से जुड़े पूर्व CM अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जज के केस से हटने की मांग की गई थी।

              जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा था- मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। मैं सुनवाई करूंगी। मैं हट गई तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से जज हटा सकते हैं।

              एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की तैयारी

              AAP नेताओं की ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा था, इसलिए हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट को ‘एमिकस क्यूरी’ यानी कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त करने का फैसला किया था। जस्टिस शर्मा ने कहा कि कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसके लिए सहमति भी दे दी है।

              इस बीच कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान उसे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अदालत व जज के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री की जानकारी मिली, जिसके बाद अवमानना कार्रवाई का फैसला लिया गया।

              CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है

              दरअसल हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई हो रही है जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शराब नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया था।

              27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया और पूरी तरह कमजोर साबित हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 लोगों को राहत दी थी।

              केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे

              दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।

              इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।

              इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।


                              Hot this week

                              रायपुर : अवैध रेत परिवहन पर प्रशासन की कार्रवाई तेज

                              गलफुल्ला नदी क्षेत्र से 4 ट्रैक्टर वाहन जब्तरायपुर (BCC...

                              रायपुर : संकट की घड़ी में शासन का संबल

                              कलेक्टर ने मृतक के परिजन को दी 4 लाख की...

                              Related Articles

                              Popular Categories