BIG NEWS: ट्रम्प सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड ने दिया इस्तीफा, अमेरिका की ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ हेड थी, बोली- पति कैंसर से जूझ रहे, मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हूं

              वॉशिंगटन डीसी: ट्रम्प की सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तुलसी अमेरिका की ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ हेड हैं, उनके अंडर 18 सीक्रेट एजेंसियां काम करती हैं।

              फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उनके पति एक बेहद दुर्लभ हड्डी के कैंसर से जूझ रहे हैं और गबार्ड इस मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हैं।

              रिपोर्ट के अनुसार, गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात के दौरान उन्हें अपने इस्तीफे की जानकारी दी। ऑफिस ऑफ डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) में उनका आखिरी दिन 30 जून होने की उम्मीद है।

              गबार्ड ने अपने चिट्ठी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का धन्यवाद भी किया और कहा कि नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

              ट्रम्प ने 13 फरवरी 2025 को तुलसी गबार्ड को खुफिया विभाग की जिम्मेदारी दी थी।

              ट्रम्प ने 13 फरवरी 2025 को तुलसी गबार्ड को खुफिया विभाग की जिम्मेदारी दी थी।

              गबार्ड बोलीं- पति सबसे मजबूत सहारा, साथ नहीं छोड़ूंगी

              गबार्ड ने अपने 11 साल के वैवाहिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि अब्राहम (पति) हमेशा उनके सबसे मजबूत सहारे रहे हैं। उन्होंने लिखा, “पूर्वी अफ्रीका में मेरी तैनाती हो, कोई राजनीतिक अभियान हो या फिर इस पद पर मेरी सेवा। हर मुश्किल समय में वे मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे।”

              उन्होंने आगे कहा, “उनकी ताकत और प्यार ने मुझे हर चुनौती से लड़ने की शक्ति दी है। ऐसे में मैं उनसे यह उम्मीद नहीं कर सकती कि वह इस कठिन लड़ाई का अकेले सामना करें जबकि मैं इतने व्यस्त और जिम्मेदारी वाले पद पर बनी रहूं।”

              गबार्ड ने यह भी कहा कि उन्होंने ऑफिस ऑफ डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) में काम करते हुए खुफिया तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और उसकी विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में अहम प्रगति की है। हालांकि उन्होंने माना कि अभी भी कई महत्वपूर्ण काम बाकी हैं।

              तुलसी गबार्ड के 5 बड़े काम

              • अमेरिका की खुफिया एजेंसियों में कई बड़े बदलाव शुरू किए। एजेंसियों का खर्च कम करने और स्टाफ घटाने की योजना चलाई। दावा किया गया कि इससे अमेरिकी सरकार के करीब 70 करोड़ डॉलर हर साल बच सकते हैं।
              • सरकारी दफ्तरों में चल रहे डीईआई कार्यक्रम भी बंद कर दिए। ये कार्यक्रम अलग-अलग समुदायों को बराबरी और प्रतिनिधित्व देने के लिए चलाए जाते थे।
              • 5 लाख से ज्यादा सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें ट्रम्प-रूस जांच और पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी व रॉबर्ट एफ. केनेडी की हत्या से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल थे।
              • क्रॉसफायर हरिकेन जांच के दस्तावेज भी जारी किए। गबार्ड का कहना था कि 2016 के चुनाव में रूस के दखल से जुड़ी खुफिया जानकारी का इस्तेमाल ओबामा सरकार के कुछ अधिकारियों ने राजनीतिक तरीके से किया था, ताकि ट्रम्प की जीत पर सवाल उठाए जा सकें।
              • राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र ने 2025 में 10 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को अमेरिका में आने से रोका, जिनके संबंध कथित ड्रग्स और आतंक नेटवर्क से बताए गए। इसके अलावा 85 हजार से ज्यादा लोगों को आतंक निगरानी सूची में डाला गया।

              डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ ट्रम्प की पार्टी में शामिल हुईं

              गबार्ड एक दशक पहले लेफ्टिनेंट कर्नल के तौर पर इराक युद्ध में लड़ चुकी हैं और अमेरिकी आर्मी रिजर्विस्ट रही हैं। उन्होंने अक्टूबर 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी।

              गबार्ड का कहना था कि डेमोक्रेटिक पार्टी कुछ एलीट लोगों के कंट्रोल में आ चुकी है। ये जंग की बातें करते हैं। श्वेत लोगों का विरोध करते हैं और नस्लभेदी ग्रुप में तब्दील हो रहे हैं। उन्होंने इस्लामी चरमपंथ को न रोक पाने के लिए डेमोक्रेटिक सरकार की आलोचना की थी।

              गबार्ड 2016 के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार थीं। बाद में उन्होंने हिलेरी क्लिंटन की जगह बर्नी सेंडर्स का समर्थन किया था। वह 2020 में भी राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी की दौड़ में शामिल रहीं। बाद में उन्होंने बाइडेन का साथ दिया।

              2022 में पार्टी छोड़ने के बाद गबार्ड ने फॉक्स न्यूज को ज्वाइन कर लिया था। वह वहां कई शो में को-होस्ट के तौर पर नजर आईं। गबार्ड ने 2022 के चुनाव में कई रिपब्लकिन उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। तभी से ये माना जाने लगा था कि वे रिपब्लिकन पार्टी ज्वाइन कर सकती हैं।

              अमेरिकी संसद में रहते हुए गबार्ड ने ओबामा और बाइडेन सरकार की खूब आलोचना की। गबार्ड ने साल 2019 में तब सुर्खियां बटोरी थीं जब उन्होंने भारतवंशी कमला हैरिस को एक डिबेट में पछाड़ा था। दरअसल दोनों 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के दावेदारों में शामिल थे। इस दौरान दोनों के बीच प्राइमरी चुनाव के लिए बहस हुई थी। इसमें कई सवालों का कमला जवाब नहीं दे सकीं।

              2019 की प्राइमरी डिबेट में तुलसी ने कमला पर आरोप लगाया था कि वे प्रोसिक्यूटर के तौर पर फेल रही हैं और उन्हें जनता से इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

              2019 की प्राइमरी डिबेट में तुलसी ने कमला पर आरोप लगाया था कि वे प्रोसिक्यूटर के तौर पर फेल रही हैं और उन्हें जनता से इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

              भारतवंशी नहीं हैं तुलसी गबार्ड

              तुलसी को उनके नाम की वजह से कई बार भारतवंशी कहा जाता है। हालांकि वे भारतवंशी नहीं हैं। वे खुद कई बार ऐसा कह चुकी हैं।

              तुलसी का जन्म एक समोअन अमेरिकी परिवार में हुआ था। उनके पिता कैथोलिक थे। मां भी ईसाई थी जिन्होंने बाद में हिन्दू धर्म अपना लिया। तुलसी भी पहले ईसाई थीं लेकिन बाद में उन्होंने हिन्दू धर्म अपना लिया।


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