रायपुर : हिरादेवी साहू ने शुरू किया स्वरोजगार-कृषि विभाग की योजना बनी सहारा

              अब गांव में ही हो रही धान की कुटाई, किसानों को मिल रही बड़ी राहत

              ​रायपुर (BCC NEWS 24): यदि शासन की योजनाओं का सही लाभ मिले और उसके साथ कड़ी मेहनत जुड़ जाए, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं। यह साबित कर दिखाया है धमतरी जिले की श्रीमती हिरादेवी साहू ने। राइस मिल की स्थापना से हिरादेवी साहू और पूरे भोंठाडीह गांव की तस्वीर बदल गई है। 

              पारंपरिक खेती और सीमित संसाधन

              धमतरी जिले के ग्राम भोंठाडीह की निवासी श्रीमती हिरादेवी साहू वर्षों से पारंपरिक खेती के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। कृषि ही उनके जीवन का मुख्य आधार था। मेहनत और लगन में कोई कमी नहीं थी, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण आर्थिक उन्नति की राह में कई मुश्किलें थीं। धान की कुटाई और प्रसंस्करण  के लिए उन्हें गांव से दूर बड़ी मिलों में जाना पड़ता था। परिवहन में काफी पैसा और समय बर्बाद होता था।गांव के छोटे किसानों के लिए कम मात्रा में धान लेकर दूर जाना और भी ज्यादा घाटे का सौदा था, जिससे अक्सर धान की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ता था।

              कृषि विभाग की योजना बनी आशा की किरण

              रादेवी के जीवन में नया मोड़ तब आया, जब उन्हें कृषि विभाग की कल्याणकारी योजना की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्होंने अपने ही गांव में मिनी राइस मिल स्थापित करने का निर्णय लिया। ​कृषि विभाग की इस योजना ने न केवल हिरादेवी को आर्थिक संबल दिया, बल्कि उनके भीतर एक उद्यमी का आत्मविश्वास भी जगाया। राइस मिल की स्थापना से हिरादेवी साहू और पूरे भोंठाडीह गांव की तस्वीर बदल गई है। अब हिरादेवी को अपने खेत के धान की कुटाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होने से परिवहन खर्च और समय दोनों की भारी बचत हो रही है। त्वरित और गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण के कारण अब उन्हें अपने उत्पाद का बाजार में पहले से कहीं बेहतर दाम मिल रहा है। हिरादेवी ने इस सुविधा को सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रखा। अब गांव और आसपास के किसान भी कम खर्च और कम समय में अपनी धान की कुटाई यहीं करा रहे हैं, जिससे हिरादेवी को नियमित अतिरिक्त आय हो रही है।

              ​ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

              इस पहल से गांव के किसानों को बहुत बड़ी राहत मिली है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं जिससे पूरे गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। ​आज हिरादेवी साहू भोंठाडीह और आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक अनूठी मिसाल बन चुकी हैं।​हिरादेवी साहू का कहना है कि शासन की इस योजना ने मुझे एक नया हौसला और पहचान दी है। अब मैं चाहती हूँ कि गांव की दूसरी महिलाएं भी आगे आएं और कृषि आधारित स्वरोजगार अपनाकर अपने पैरों पर खड़ी हों।


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