रायपुर : संघर्ष से सफलता तक : स्व-सहायता समूह से जुड़कर मंजू बनीं ‘लखपति दीदी’

              खेती, पशुपालन और स्वरोजगार से हर महीने 30 हजार तक आय अर्जित कर बनीं आत्मनिर्भर

              सरकारी योजनाओं और आत्मविश्वास ने बदली जिंदगी, अब अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

              रायपुर (BCC NEWS 24): ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित शासन की योजनाएं प्रदेश में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। बलरामपुर जिला के ग्राम पंचायत संतोषीनगर की निवासी श्रीमती मंजू सय्यल इसकी प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी हैं। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी से जूझने वाली श्रीमती मंजू आज खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और सब्जी व्यवसाय के माध्यम से हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

              जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद श्रीमती मंजू के जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें स्वरोजगार अपनाने का आत्मविश्वास दिया। उन्होंने समूह से ऋण लेकर खेती और पशुपालन का कार्य प्रारंभ किया। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद श्रीमती मंजू ने लगातार मेहनत और लगन से अपने काम को आगे बढ़ाया और आज वे गांव की सफल महिला उद्यमी के रूप में जानी जा रही हैं।

              श्रीमती मंजू अपने खेतों में सब्जियों का उत्पादन करती हैं और प्रतिदिन बाजार में बिक्री कर अतिरिक्त आय अर्जित करती हैं। उनकी मेहनत और प्रबंधन क्षमता ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। अब वे अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए किराना दुकान शुरू करने की योजना भी बना रही हैं।खेती को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने में शासन की योजनाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृषि विभाग द्वारा उन्हें सिंचाई पंप उपलब्ध कराया गया, जिससे समय पर सिंचाई संभव हो सकी। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड मिलने से कृषि कार्यों के लिए आर्थिक सहायता और सुविधा मिली।

              श्रीमती मंजू को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिला, जिससे उनका सुरक्षित घर का सपना साकार हुआ। स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत शौचालय निर्माण से घर में स्वच्छता और सुविधा बढ़ी, वहीं राशन कार्ड के माध्यम से नियमित खाद्यान्न मिलने से परिवार को आर्थिक राहत भी मिली।

              श्रीमती मंजू सय्यल बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय साबित हुआ। आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि अवसर, योजनाओं का लाभ और दृढ़ इच्छाशक्ति साथ हो, तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।


                              Hot this week

                              Related Articles

                              Popular Categories