राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा रहीं मुख्य अतिथि, जनसुनवाई में सुनीं जनजातीय समाज की समस्याएं
रायपुर (BCC NEWS 24): भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के अवसर पर सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में हुल क्रांति दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया। जिला प्रशासन सरगुजा एवं आदिम जाति विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में जिले के 14 जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों सहित लगभग 1,500 लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुण्डा, शहीद वीर नारायण सिंह, मांझी राम गोड़, सिद्धू-कान्हू, समाज सुधारक राजमोहनी देवी, संत गहिरा गुरु एवं जगदेव राम उरांव के छायाचित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रमुखों ने डॉ. आशा लकड़ा का पारंपरिक स्वागत किया।

अपने संबोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की भूमिका, अधिकारों एवं दायित्वों की जानकारी देते हुए कहा कि आयोग अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने भगवान बिरसा मुण्डा के संघर्ष, नेतृत्व और जनजातीय अस्मिता की रक्षा में उनके योगदान को स्मरण करते हुए हुल क्रांति के महानायक सिद्धू-कान्हू के साहस एवं बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने जनसुनवाई कर विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी ली और संबंधित विषयों पर आवश्यक पहल का आश्वासन दिया। इस अवसर पर उरांव, कंवर, मांझी, गोंड, खैरवार, पंडो, नागवंशी, मझवार, नगेसिया, कोरवा, बिंझिया, मुण्डा, भुईया एवं पहाड़ी कोरवा सहित विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रमुख उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनमें स्वाभिमान, जागरूकता और प्रेरणा का संचार करना था।

(Bureau Chief, Korba)



