
भू-जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन को लेकर विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव
बिलासपुर (BCC NEWS 24): साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय, बिलासपुर में “Ground Water Regulation and Control” विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (CGWA), नई दिल्ली तथा केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB), उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भू-जल संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा इससे जुड़े नियामकीय प्रावधानों की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम के समापन अवसर पर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के कार्यपालक निदेशक (पर्यावरण) श्री सी. जयदेव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न क्षेत्रों एवं इकाइयों से आए अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में श्री सी. जयदेव ने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और जल का वैज्ञानिक प्रबंधन समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए नियमों, बेहतर कार्यप्रणालियों और जल संरक्षण के प्रभावी उपायों को समझने का अवसर मिलता है। दो दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों एवं इकाइयों से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने भू-जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण (Recharge), उद्योगों में जल के बेहतर उपयोग तथा भू-जल से जुड़े नियामकीय प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (CGWA), नई दिल्ली से डॉ. प्रबीर के. नाइक (Regional Director), श्री उद्देश्य कुमार (Scientist-C) एवं सुश्री एच. वी. सोफिया के (Scientist-C) तथा केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB), उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर से डॉ. भूषण आर. लामसोगे (Regional Director), श्री सिद्धांत कुमार साहू (Scientist-C), सुश्री सायली उमेश तेंबूर्णे (Scientist-C) एवं श्री प्रमोद साहू (Scientist-C) ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने भू-जल प्रबंधन, आवश्यक अनुमतियों, जल संरक्षण तथा अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े विभिन्न प्रश्न विशेषज्ञों से पूछे। विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों का सरल एवं व्यावहारिक उत्तर देते हुए प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। समापन सत्र में विशेषज्ञों ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने तथा उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों में जल का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग और नियामकीय प्रावधानों का पालन सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि श्री सी. जयदेव द्वारा प्रशिक्षण में सहभागी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहां प्राप्त जानकारी उनके कार्यक्षेत्र में बेहतर जल प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी। दो दिवसीय यह प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला एसईसीएल में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, भू-जल के वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा सतत एवं जिम्मेदार खनन गतिविधियों को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

(Bureau Chief, Korba)



