रायपुर (BCC NEWS 24): छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) को कृषि व आजीविका गतिविधियों के लिए करोड़ों रुपए के ऋण और स्वीकृति पत्र वितरित किए जा रहे हैं। किसानों को खेती के खर्च और फसल की जरूरतों के लिए समय पर ऋण दिया जाता है । प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है।

किसानों को सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा एक भव्य मेगा कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन धमतरी में किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान बैंक के रायपुर रीजन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 92 किसान हितग्राहियों और महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) के लिए कुल 71.49 करोड़ रुपये के कृषि ऋण स्वीकृत किए। इस वृहद आउटरीच कार्यक्रम में धमतरी एवं आसपास के क्षेत्रों से लगभग 100 किसान प्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और बैंक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
साहूकारी व्यवस्था से मुक्ति और आर्थिक सशक्तिकरण
स्वीकृत ऋण राशि से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों के विस्तार में सीधा वित्तीय सहयोग मिलेगा। बैंक अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-संस्थागत साहूकारों पर किसानों की निर्भरता को समाप्त करना और उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
समय पर मिला ऋण ही कृषि अर्थव्यवस्था का आधार- महाप्रबंधक रोहित कुमार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बैंक के महाप्रबंधक ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बैंक का उद्देश्य केवल ऋण देना नहीं, बल्कि किसानों को सही वित्तीय उत्पाद, आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन देकर उनका सर्वांगीण विकास करना है। पारदर्शी संवाद ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
बैंक और किसानों के बीच सीधा संवाद
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और किसानों के बीच सीधा संवाद सत्र आयोजित किया गया। किसानों ने बैंकिंग सेवाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए, वहीं बैंक अधिकारियों ने ऋण पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया को और अधिक सरल व किसान-हितैषी बनाने का आश्वासन दिया। यह आउटरीच कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करने, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को नई गति देने की दिशा में एक बेहद सार्थक कदम साबित हुआ है।

(Bureau Chief, Korba)






