BIG NEWS: ट्रम्प ने अपनी टीम से वार्ता रोकने को कहा, बोले- ईरान डील के लिए तैयार हो, तभी बातचीत होगी

        वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से बातचीत कर रही अपनी टीम को फिलहाल वार्ता रोकने का निर्देश दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा है कि जब तक तेहरान किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तब तक आगे की बातचीत नहीं होगी।

        अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अब तक बातचीत सकारात्मक रही थी, लेकिन ट्रम्प ने अगले दौर की बातचीत शुरू करने से पहले इंतजार करने का फैसला किया है।

        वहीं, UAE ने ईरान के साथ सभी तरह का व्यापार और वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक रोकने का ऐलान किया है। UAE ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। दरअसल, UAE ने मंगलवार को ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

        UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुछ समय पहले तक ईरान के साथ तनाव कम करने और बातचीत के पक्ष में थे।

        UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुछ समय पहले तक ईरान के साथ तनाव कम करने और बातचीत के पक्ष में थे।

        UAE, ईरान का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर

        UAE, चीन के बाद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच हर साल अरबों डॉलर का गैर-तेल व्यापार होता है। दुबई लंबे समय से ईरान के लिए व्यापार और बैंकिंग का बड़ा केंद्र रहा है।

        ईरान बड़ी मात्रा में सामान UAE के जरिए मंगाता है, जबकि दोनों देशों के बीच शिपिंग, ऊर्जा और वित्तीय लेनदेन भी बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में व्यापार रोकने का फैसला दोनों देशों के कारोबार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।

        भारत और दूसरे एशियाई देशों का बड़ा समुद्री व्यापार UAE के बंदरगाहों से होकर गुजरता है। अगर ईरान-UAE तनाव और बढ़ता है तो शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।

        UAE के प्रमुख बंदरगाह होर्मुज स्ट्रेट के पास हैं। अगर ईरान और UAE के रिश्ते और बिगड़ते हैं तो इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

        UAE का दावा- ईरान ने दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं

        UAE ने आरोप लगाया है कि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। UAE के मुताबिक, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने दोनों मिसाइलों का पता लगा लिया था।

        UAE का कहना है कि एक मिसाइल उसकी समुद्री सीमा के बाहर गिरी, जबकि दूसरी उसके समुद्री क्षेत्र में गिरी। उसका दावा है कि दोनों मिसाइलों का निशाना समुद्र में चल रहे जहाज थे।

        ईरान ने UAE के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान ने UAE की तरफ कोई मिसाइल नहीं दागी। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप क्षेत्र में शांति बहाल करने की कोशिशों को कमजोर करते हैं।

        UAE का दावा- ईरान ने 3000 मिसाइल-ड्रोन दागीं

        UAE का कहना है कि 28 फरवरी को क्षेत्रीय संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने उसके खिलाफ करीब 3,000 मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। UAE का कहना है कि किसी भी दूसरे देश की तुलना में ईरान ने उस पर सबसे ज्यादा हमले किए।

        UAE का आरोप है कि इन हमलों का निशाना सिर्फ सैन्य ठिकाने नहीं, बल्कि तेल टैंकर, समुद्री जहाज और ऊर्जा ढांचा भी रहा। हालांकि ईरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

        पिछले सप्ताह अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दो जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

        पिछले सप्ताह अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दो जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

        जून में हुआ समझौता ज्यादा दिन नहीं चला

        UAE और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए जून में एक समझौता हुआ था। इसके बाद कुछ समय तक मिसाइल और ड्रोन हमले रुक गए और उम्मीद जताई गई कि हालात सामान्य हो जाएंगे। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी।

        कुछ ही हफ्तों बाद दोनों देशों ने फिर एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए और समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव दोबारा बढ़ गया।

        जंग की शुरुआती दिनों में ईरान ने UAE पर ड्रोन हमले किए थे। इसमें दुबई की एक इमारत की पार्किंग में आग लग गई थी।

        जंग की शुरुआती दिनों में ईरान ने UAE पर ड्रोन हमले किए थे। इसमें दुबई की एक इमारत की पार्किंग में आग लग गई थी।

        होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा विवाद

        तनाव की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और शांति समझौते में तय शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रह सकता है।

        दूसरी ओर अमेरिका और खाड़ी देश चाहते हैं कि इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य हो, क्योंकि दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होती है।



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