रायपुर : पशुपालन बना आर्थिक समृद्धि का नया आधार

        KCC से 263 पशुपालकों को मिले 2.07 करोड़ रुपए

        रायपुर (BCC NEWS 24): पशुपालन आज भारत और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन रहा है, जो किसानों को नियमित आय, महिलाओं के लिए रोजगार और कृषि क्षेत्र के कुल मूल्य वर्धन में 30% से अधिक का योगदान देता है। ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पशुधन विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन की साझा पहल से पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा बनकर उभर रहा है। जिले में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ पशुपालकों को वित्तीय संबल देने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के अब जमीनी और बेहद सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

        ग्रामीण क्षेत्र में किसान क्रेडिट कार्ड किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार

        कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन और पशुधन विकास विभाग के उप संचालक के सतत प्रयासों से जिले के ग्रामीण क्षेत्र में किसान क्रेडिट कार्ड (AHD) योजना के जरिए आर्थिक मजबूती दी जा रही है। इस वर्ष मार्च 2026 से जून 2026 के बीच विभाग द्वारा विभिन्न बैंकों को कुल 408 प्रकरण भेजे गए थे, जिनमें से 263 हितग्राहियों को 2 करोड़ 07 लाख 25 हजार 375 रुपए का आसान और कम ब्याज दर पर ऋण प्रदाय किया जा चुका है। वित्तीय सहायता मिलने से किसानों की आय में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है और वे तेजी से आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

        37 बकरी पालकों को 24 लाख 28 हजार 313 रुपए का लाभ पहुँचाया गया

        इस पूरी सफलता की कहानी में वित्तीय संस्थानों की भूमिका भी बेहद सराहनीय रही है। भारतीय स्टेट बैंक ने बरमकेला और सारंगढ़ विकासखंड के 100 गाय पालकों को 1 करोड़ रुपए की राशि से लाभांवित किया, जबकि इन्हीं क्षेत्रों के 37 बकरी पालकों को 24 लाख 28 हजार 313 रुपए का लाभ पहुँचाया। वहीं एचडीएफसी बैंक ने 88 प्रकरणों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 53 लाख 26 हज़ार 129 रुपए का ऋण वितरित किया।

        33 हितग्राहियों को कुल 26 लाख 50 हजार 848 रुपए का KCC ऋण उपलब्ध

        इसके अलावा, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक ने मवेशियों के भरण-पोषण और गाय पालन के लिए बरमकेला और सारंगढ़ के 33 हितग्राहियों को कुल 26 लाख 50 हजार 848 रुपए का KCC ऋण उपलब्ध कराया। साथ ही, बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक हितग्राही को 2 लाख 285 रुपए और बैंक ऑफ इंडिया ने एक हितग्राही को 1 लाख 20 हजार रूपए की राशि स्वीकृत कर पशुपालन को बढ़ावा देने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। समय पर मिली इस वित्तीय मदद से जिले के किसान अब पशुपालन को केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और लाभप्रद व्यवसाय के रूप में अपनाकर अपनी तकदीर संवार रहे हैं।



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