रायपुर : पीएमएफबीवाय में केसीजी ने रचा नया कीर्तिमान, गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी में जबरदस्त छलांग

        रायपुर (BCC NEWS 24): प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले ने खरीफ 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले वर्ष की तुलना में जिले में फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या के साथ-साथ बीमित क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।

        गैर-ऋणी किसानों का भरोसा हुआ दोगुना

        खरीफ 2025 में जिले से 11,338 गैर-ऋणी किसान आवेदन प्राप्त हुए थे। खरीफ 2026 में यह संख्या बढ़कर 21,186 किसान आवेदन हो गई है। इस प्रकार गैर-ऋणी किसानों की संख्या में 186 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि किसानों में फसल बीमा योजना के प्रति बढ़ते विश्वास और जागरूकता को दर्शाती है।

        गैर-ऋणी किसानों का बीमित क्षेत्रफल 181 प्रतिशत बढ़ा

        इसी प्रकार गैर-ऋणी किसानों के बीमित क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खरीफ 2025 में जहां 2,972 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ था, वहीं खरीफ 2026 में यह बढ़कर 5,399 हेक्टेयर हो गया है। इस प्रकार बीमित क्षेत्रफल में लगभग 181 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

        ऋणी किसानों की भागीदारी भी बढ़ी

        फसल बीमा योजना में ऋणी किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। खरीफ 2025 में 3,12,493 ऋणी किसान आवेदन प्राप्त हुए थे, जो खरीफ 2026 में बढ़कर 3,15,857 किसान आवेदन हो गए। इसी प्रकार ऋणी किसानों का बीमित क्षेत्रफल 71,874 हेक्टेयर से बढ़कर 72,270 हेक्टेयर हो गया है। ऋणी किसानों की एंट्री अभी जारी है जिसमें बढ़ोत्तरी संभावित है।

        जागरूकता कार्यक्रम का असर

        जिले में फसल बीमा योजना के प्रति किसानों में बढ़ती जागरूकता से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। फसल बीमा में किसानों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि किसान अब अपनी फसल को प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से सुरक्षित रखने के लिए फसल बीमा को महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में अपना रहे हैं।

        प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल को हुए नुकसान के कारण किसानों को होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिले में किसानों की बढ़ती भागीदारी से कृषि क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और जोखिम-प्रतिरोधी बनाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।



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