BREAKING: बांग्लादेश को मिला नया राष्ट्रपति, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर 167 वोटों से जीते

          ढाका: बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा आ गया है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्हें संसद में 255 वोट मिले, जबकि विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 88 वोट मिले।

          राष्ट्रपति चुनाव के लिए गुरुवार को संसद भवन में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान हुआ। मतदान खत्म होते ही वोटों की गिनती शुरू की गई और इसके बाद नतीजे घोषित कर दिए गए। इस चुनाव में कुल 349 सांसदों ने मतदान किया।

          बांग्लादेश में राष्ट्रपति को जनता सीधे नहीं चुनती, बल्कि संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। संसद में BNP के पास दो-तिहाई बहुमत होने के कारण आलमगीर की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी। उनके सामने जमात-ए-इस्लामी की अगुआई वाले 11 दलों के गठबंधन के समर्थन वाले एलडीपी उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद थे।

          राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ीं 4 तस्वीरें…

          मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत के बाद उन्हें गुलाब देते प्रधानमंत्री तारिक रहमान।

          मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत के बाद उन्हें गुलाब देते प्रधानमंत्री तारिक रहमान।

          प्रधानमंत्री तारिक रहमान राष्ट्रपति चुनाव में अपनी वोटिंग पर्ची बैलेट बॉक्स में डालते हुए।

          प्रधानमंत्री तारिक रहमान राष्ट्रपति चुनाव में अपनी वोटिंग पर्ची बैलेट बॉक्स में डालते हुए।

          राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान।

          राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान।

          राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग पूरी होने के बाद बैलेट बॉक्स खोला गया और मतपत्रों को गिनती के लिए निकाला गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई।

          राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग पूरी होने के बाद बैलेट बॉक्स खोला गया और मतपत्रों को गिनती के लिए निकाला गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई।

          ओली अहमद बोले- सांसदों को वोट की आजादी नहीं

          बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद ने चुनाव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव का नतीजा पहले से तय था और बांग्लादेश में लोकतंत्र नियंत्रित है।

          ढाका में गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए ओली ने कहा कि किसी भी सांसद को अपनी मर्जी से वोट देने की आजादी नहीं है। पार्टी जिस उम्मीदवार को वोट देने को कहती है, सांसद को उसी के पक्ष में वोट देना पड़ता है।

          उन्होंने संविधान के आर्टिकल 70 का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई सांसद अपनी पार्टी के फैसले के खिलाफ वोट करता है, तो उसकी संसद की सदस्यता जा सकती है।

          21 अगस्त को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी

          BNP ने ऐलान किया है कि मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर राष्ट्रपति चुने जाने के बाद 21 अगस्त की शाम को बंगभवन में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

          पार्टी के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने इसकी पुष्टि की है। अगर चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक रहे, तो आलमगीर बांग्लादेश के 24वें राष्ट्रपति बन जाएंगे।

          BNP के खिलाफ 11 दलों का गठबंधन

          350 सीटों वाली संसद में BNP के पास 247 सांसद हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी की अगुआई वाले 11 दलों के गठबंधन के पास 81 सांसद हैं।

          राष्ट्रपति चुनाव में 349 सांसद वोट डालेंगे। चटगांव-4 सीट फिलहाल खाली है। अदालत के आदेश के बाद इस सीट से निर्वाचित उम्मीदवार की सदस्यता रद्द कर दी गई थी।

          आखिरी बार 1991 में चुनाव में मुकाबला हुआ था

          बांग्लादेश में अब तक 12 राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। इनमें 8 बार राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए। संविधान लागू होने के बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव 1974 में हुआ, जिसमें सांसदों ने वोट देकर मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह को चुना।

          1975 में संविधान संशोधन के बाद राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता से कराने की व्यवस्था हुई। इसके तहत 1978, 1981 और 1986 में लगातार तीन बार जनता ने राष्ट्रपति चुना।

          1991 में फिर संसदीय व्यवस्था लागू हुई और राष्ट्रपति का चुनाव दोबारा सांसदों के जरिए होने लगा। 1991 में दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ।

          इसके बाद 2023 तक सभी चुनाव निर्विरोध रहे, क्योंकि हार के डर से विपक्ष ने उम्मीदवार नहीं उतारा। 1991 के बाद 35 साल में पहली बार बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हो रहा है। यानी सांसदों को मतदान करना होगा।

          बांग्लादेश में 35 साल बाद चुनाव क्यों हुआ

          बांग्लादेश में इतने साल बाद राष्ट्रपति चुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि 1991 के बाद से अब तक विपक्ष अपना उम्मीदवार नहीं उतार रही थी।

          दरअसल, बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती। सांसद वोट देकर राष्ट्रपति चुनते हैं। इसलिए अगर संसद में सत्ता पक्ष के पास स्पष्ट बहुमत हो, तो विपक्षी उम्मीदवार की जीत की संभावना लगभग नहीं रहती।

          ऐसे में विपक्ष के सामने दो विकल्प होते थे

          1. चुनाव लड़कर लगभग तय हार का सामना करना
          2. या उम्मीदवार न उतारकर चुनाव को निर्विरोध होने देना

          1996 से 2023 के बीच सत्ता पक्ष का उम्मीदवार मजबूत स्थिति में रहा। इसलिए विपक्ष की ओर से अलग उम्मीदवार उतारने का राजनीतिक फायदा बहुत कम था।

          हार के बावजूद विपक्ष ने उम्मीदवार क्यों उतारा

          विपक्ष के लिए यह चुनाव सिर्फ राष्ट्रपति चुनने का नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का भी मौका है। इससे 11 दलों के गठबंधन को एकजुट रखने और अपनी पहचान मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

          पूर्व राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद चुनाव की नौबत आई

          बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव की जरूरत पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद पड़ी। 76 साल के शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

          शहाबुद्दीन पूर्व पीएम शेख हसीना के करीबी माने जाते हैं। वह अप्रैल 2023 से देश के राष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल 2028 तक चलना था, लेकिन अचानक उन्हें बीच में ही पद छोड़ना पड़ा।

          मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था।

          मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था।



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