रायपुर : सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी : उज्ज्वला से रसोई में बचा समय बना संतोषी की खेती-बाड़ी का सहारा

        लकड़ी जुटाने और चूल्हे पर खाना बनाने की परेशानी हुई कम, परिवार की दिनचर्या हुई आसान

        बच्चों का टिफिन समय पर हो रहा तैयार, रसोई का काम निपटाकर खेतों में भी दे पा रही पूरा समय

        संतोषी ने कहा-गैस की सुविधा से समय की बचत, घर और खेती की जिम्मेदारियों में बना बेहतर तालमेल

        रायपुर (BCC NEWS 24): ग्रामीण परिवारों के जीवन में रसोई की एक सुविधा किस तरह पूरे परिवार की दिनचर्या बदल सकती है, इसकी तस्वीर अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो निवासी संतोषी पात्र के परिवार में देखने को मिलती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से मिली रसोई गैस की सुविधा ने संतोषी को लकड़ी जुटाने और धुएं के बीच चूल्हे पर भोजन बनाने की परेशानी से राहत दी है। अब कम समय में रसोई का काम पूरा होने से वे बच्चों की जरूरतों के साथ खेती-बाड़ी के काम के लिए भी पर्याप्त समय निकाल पा रही हैं।

        सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए संतोषी बताती हैं कि उनका परिवार खेती-बाड़ी कर जीवनयापन करता है। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए नाश्ता और टिफिन तैयार करना होता है, वहीं खेत के काम के लिए भी समय पर पहुंचना जरूरी रहता है। पहले लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाने में अधिक समय लगने के कारण घर और खेत की जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बैठाना कठिन होता था।

        लकड़ी जुटाने में लगता था समय और पैसा

        संतोषी बताती हैं कि गैस कनेक्शन मिलने से पहले परिवार की रसोई पूरी तरह लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर थी। भोजन बनाने से पहले जलाऊ लकड़ी की व्यवस्था करनी पड़ती थी। कई बार इसके लिए जंगल जाना पड़ता था और लकड़ी उपलब्ध नहीं होने पर बाजार या अन्य माध्यम से खरीदनी पड़ती थी। उनके अनुसार लकड़ी खरीदने पर करीब 200 से 250 रुपये तक खर्च हो जाते थे। इसके बाद चूल्हा जलाने और भोजन तैयार करने में भी अधिक समय लगता था। चूल्हे से निकलने वाला धुआं रसोई के काम को और कठिन बना देता था। सुबह भोजन तैयार करने में होने वाली देरी का असर बच्चों की स्कूल की तैयारी और खेती-बाड़ी के दूसरे कामों पर भी पड़ता था।

        बच्चों का टिफिन भी समय पर, खेत का काम भी आसान

        प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस की सुविधा मिलने के बाद संतोषी की दिनचर्या आसान हुई है। अब सुबह कम समय में नाश्ता और भोजन तैयार हो जाता है। बच्चों का टिफिन समय पर तैयार होने से उन्हें स्कूल भेजने में भी सुविधा हुई है। रसोई का काम जल्दी पूरा होने का लाभ संतोषी को खेती-बाड़ी में भी मिल रहा है। वे घर की जिम्मेदारियां पूरी कर समय पर खेत पहुंच पा रही हैं। खेत में चल रहे काम की देखरेख और खेती से जुड़े अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी उन्हें अधिक समय मिल रहा है।

        रसोई में बचा समय खेती और परिवार के काम आया

        संतोषी के लिए उज्ज्वला योजना से मिला गैस कनेक्शन केवल भोजन पकाने की सुविधा नहीं, बल्कि समय बचाने का माध्यम भी बना है। पहले लकड़ी जुटाने और चूल्हे पर खाना बनाने में लगने वाला समय अब बच्चों की देखभाल और खेती-बाड़ी के काम में उपयोग हो रहा है। इससे उन्हें घर और खेत की जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिली है।

        संतोषी पात्र ने कहा कि “गैस की सुविधा मिलने से खाना जल्दी बन जाता है। बच्चों का टिफिन समय पर तैयार हो जाता है और घर का काम पूरा कर खेती-बाड़ी के लिए भी समय मिल जाता है।” उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा से उनके परिवार की रोजमर्रा की दिनचर्या काफी आसान हुई है।

        सेवा संकल्प अभियान के तहत संतोषी की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि रसोई में समय बचाने वाली सुविधा का लाभ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। इससे बचा समय ग्रामीण महिलाओं को परिवार, बच्चों और आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए अधिक अवसर दे रहा है।



                Hot this week

                Related Articles

                Popular Categories