रायपुर : सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी : परंपरागत खेती से स्मार्ट खेती की ओर बढ़े किसान योगेश सिंह, ग्राफ्टेड टमाटर ने बढ़ाई आमदनी

        उद्यान विभाग के मार्गदर्शन से मक्का की पारंपरिक खेती के साथ अपनाई ग्राफ्टेड टमाटर की उन्नत तकनीक

        40 डिसमिल में करीब 90 क्विंटल टमाटर का उत्पादन, बिक्री से मिली लगभग 1.35 लाख रुपये की आय

        आरकेवीवाई के तहत पौध सामग्री के लिए मिला 30 हजार रुपये का अनुदान, अब दूसरे किसानों को भी नई तकनीक अपनाने के लिए कर रहे प्रेरित

        रायपुर (BCC NEWS 24): खेती में नई तकनीक, उन्नत पौध सामग्री और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आमदनी के नए रास्ते खोल सकते हैं। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम अमदला निवासी किसान श्री योगेश सिंह ने परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी की आधुनिक तकनीक को अपनाकर इसकी मिसाल पेश की है। मक्का की पारंपरिक खेती करने वाले योगेश ने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ग्राफ्टेड टमाटर की खेती शुरू की। करीब 40 डिसमिल क्षेत्र में लगभग 90 क्विंटल टमाटर का उत्पादन लेकर उन्होंने करीब 1.35 लाख रुपये की आय प्राप्त की है।

        योगेश सिंह के पास कुल 4.402 हेक्टेयर भूमि है। पहले वे मुख्य रूप से पारंपरिक तरीके से मक्का की खेती करते थे। खेती से आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और विभागीय योजनाओं तथा आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों की जानकारी ली। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर की खेती के बारे में बताया गया। विभागीय मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने खेती में नई तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

        40 डिसमिल में 90 क्विंटल टमाटर का उत्पादन

        योगेश सिंह ने लगभग 40 डिसमिल क्षेत्र में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती की। इस पर करीब 75 हजार रुपये की लागत आई। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पौध सामग्री के लिए उन्हें 30 हजार रुपये का अनुदान भी मिला, जिससे शुरुआती लागत का भार कम करने में मदद मिली।

        उन्नत पौध सामग्री, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से लगभग 90 क्विंटल टमाटर का उत्पादन हुआ। इसकी बिक्री से योगेश को करीब 1 लाख 35 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। खेती में किए गए इस प्रयोग ने उन्हें पारंपरिक फसल के साथ अधिक आय देने वाली उद्यानिकी फसलों की संभावनाओं से भी जोड़ा है।

        शासकीय योजना और तकनीकी मार्गदर्शन बना बदलाव का आधार

        योगेश की इस पहल में उनकी मेहनत के साथ उद्यान विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिली सहायता उपयोगी साबित हुई। विभाग से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने उन्नत पौध सामग्री और आधुनिक खेती की पद्धति को अपनाया।

        योगेश बताते हैं कि किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर नई तकनीकों को भी आजमाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के माध्यम से उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग कर खेती से आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

        अब दूसरे किसानों को भी आधुनिक खेती के लिए कर रहे प्रेरित

        ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से मिले परिणामों के बाद योगेश सिंह अब आसपास के किसानों को भी उद्यान विभाग से जुड़ने, शासकीय योजनाओं की जानकारी लेने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि नई जानकारी और तकनीक को अपनाने की पहल खेती में बदलाव का आधार बन सकती है।

        सेवा संकल्प अभियान के तहत योगेश सिंह की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि किसान परंपरागत खेती के अनुभव के साथ आधुनिक उद्यानिकी तकनीक और शासकीय सहायता को जोड़कर अपनी खेती में विविधता ला सकते हैं और आमदनी के नए अवसर तैयार कर सकते हैं।



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