कम हीमोग्लोबिन और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच सरकारी सहायता बनी सहारा, गौरी ने दिया स्वस्थ शिशु को जन्म
बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में खुलवाया खाता, अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
रायपुर (BCC NEWS 24): मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षित मातृत्व और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दे रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदेश के ग्रामीण अंचलों तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिए आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। इस योजना का लाभ लेकर बेमेतरा जिले के विकासखंड बेरला अंतर्गत ग्राम सांकरा की निवासी श्रीमती गौरी पाटिल ने न केवल गर्भावस्था के दौरान आई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना किया, बल्कि पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से एक स्वस्थ शिशु को जन्म देकर मातृत्व के सुखद अनुभव को प्राप्त किया।
श्रीमती गौरी पाटिल की यह कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले सहयोग की प्रेरणादायक मिसाल है। गौरी बताती हैं कि जब उन्हें पहली बार अपने मां बनने की जानकारी मिली, तो उनके मन में अनेक सपने और उम्मीदें जाग उठीं। परिवार में नए सदस्य के आगमन की खुशी थी, लेकिन गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जांच में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम पाए जाने से उनकी चिंता बढ़ गई। उन्हें अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत की भी चिंता सताने लगी। ऐसे समय में उचित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और देखभाल की आवश्यकता उनके सामने एक बड़ी चुनौती थी।
गौरी बताती हैं कि इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में जानकारी दी। योजना के उद्देश्य, पात्रता और मिलने वाली आर्थिक सहायता के संबंध में मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रथम किस्त के रूप में एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। यह राशि उनके लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उम्मीद और आत्मविश्वास का सहारा बनी।
गौरी ने इस सहायता राशि का सदुपयोग करते हुए अपने स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता दी। उन्होंने प्राप्त राशि से पौष्टिक फल और सब्जियों के बीज खरीदे तथा घर में ही पोषण वाटिका तैयार की। इस वाटिका से परिवार को ताजी हरी सब्जियां उपलब्ध होने लगीं। उन्होंने अपने दैनिक भोजन में पौष्टिक आहार को शामिल किया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सलाह के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियां बरतीं।
गर्भावस्था के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग भी उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण संबंधी सलाह और बेहतर देखभाल से गौरी को गर्भावस्था की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिली। आखिरकार वह सुखद क्षण आया, जब उन्होंने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। अपने नवजात बच्चे को पहली बार गोद में लेते ही उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। लंबे समय से मन में बनी चिंता अब मातृत्व की खुशी में बदल चुकी थी।
गौरी बताती हैं कि बच्चे के जन्म के बाद उन्होंने योजना की दूसरी किस्त के लिए भी आवेदन किया, जिसके अंतर्गत उन्हें पुनः एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्हें प्रसव के बाद की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिली।
बेटी के जन्म के साथ ही गौरी ने उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी कदम बढ़ाया। उन्होंने अपनी बेटी के नाम से सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत बचत खाता खुलवाया, ताकि भविष्य में उसकी शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक बचत की जा सके। उनका मानना है कि बेटियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देना प्रत्येक परिवार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
श्रीमती गौरी पाटिल का कहना है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने उन्हें जरूरत के समय आर्थिक सहयोग देने के साथ ही अपने स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक भी बनाया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार और चिकित्सकीय सलाह का पालन सुरक्षित मातृत्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।
गौरी ने अन्य गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे कठिन परिस्थितियों में हिम्मत न हारें, आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखें और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अवश्य उठाएं। उन्होंने कहा कि समय पर मिलने वाली छोटी आर्थिक सहायता भी जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच गौरी पाटिल की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि सही समय पर आर्थिक सहायता, जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने से मातृत्व का सफर अधिक सुरक्षित और सुखद बनाया जा सकता है। गौरी की यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि आत्मविश्वास, परिवार के सहयोग और शासकीय योजनाओं के सदुपयोग से जीवन की कठिन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

(Bureau Chief, Korba)





