Monday, February 16, 2026

              अस्पताल में नर्स की लापरवाही से बच्चे की मौत… गले में नाल फंसी होने के बाद भी जबरदस्ती कराई नॉर्मल डिलीवरी

              भिलाई: छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला में नर्स की लापरवाही ने एक नवजात बच्चे की जान ले ली। परिजनों ने आरोप लगाया है नर्स ने जबरदस्ती क्रिटिकल केस होने के बाद भी जबरदस्ती नॉर्मल डिलीवरी करनी चाही। उसने प्रसूता को दर्द के इंजेक्शन देने के साथ पेट को इतना पुस किया कि बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच करने की बात कही है।

              भिलाई तीन चरोदा वार्ड 27 निवासी उमेश कुमार रवानी (38 साल) ने बताया कि उसकी पत्नी संतोषी रवानी को बच्चा होना था। उसने उसे 29 मार्च को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला में भर्ती कराया था। सभी जांच के बाद डॉक्टरों ने संतोषी को प्रसूता वार्ड में एडमिट कर लिया। 30 मार्च की रात अचानक संतोषी लेबर पेन होने लगा। जब नर्स को बुलाया तो वो चिल्लाने लगी। नर्स का कहना था कि उसकी शिफ्ट खत्म हो गई है। उसी समय लेबर पेन होना था। घरवालों ने दबाव बनाया तो नर्स उसे ओटी ले गई। वहां उसने उसे दर्द के इंजेक्शन लगाए और जबरदस्ती नॉर्मल डिलीवरी कराने की कोशिश करने लगी। बच्चे के गले में नाल फंसी होने के चलते उसका दम घुटने लगा और वो पेट के अंदर ही मर गया। जब बच्चा मृत पैदा हुआ नर्स ने तुरंत उसे दुर्ग अस्पताल रेफर कर दिया।

              अस्पताल में की गई सोनोग्राफी की रिपोर्ट

              अस्पताल में की गई सोनोग्राफी की रिपोर्ट

              चिकित्सा अधीक्षक ने बताई डॉक्टर की समस्या
              अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्वामी देव भूपेंद्र देवांगन का कहना है कि अस्पताल में गायनकोलॉजिस्ट नहीं है। वो एक डॉक्टर के भरोसे किसी तरह इलाज कर रहे हैं। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी करने में काफी परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि इसके लिए उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।

              प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्वामी देव भूपेंद्र देवांगन

              प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्वामी देव भूपेंद्र देवांगन

              चिकित्सा अधीक्षक ने माना हुई है लापरवाही
              प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्वामी देव भूपेंद्र देवांगन का कहना है कि देवांगन सिस्टर ने डिलीवरी कराई थी। देवांगन सिस्टर यदि कहा कि उन्हें घर जल्दी जाना है तो ये गलत है। बच्चे की यदि लापरवाही से मौत हुई थी तो उसका पीएम होना था, लेकिन उसे दुर्ग अस्पताल भेजा गया। वहां उसे दफनाया क्यों गया इस बरे में कुछ नहीं कह सकता हूं।


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