Saturday, January 10, 2026

              यहां कलेक्टर ही तोड़ रहे हैं ट्रैफिक नियम… काली फिल्म लगी कार से कर रहे दौरा-निरीक्षण, SP ने कहा- कलेक्टर साहब से बात करूंगा

              मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: जिला कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा खुद यातायात नियमों का पालन नहीं करते हुए नजर आते हैं। खिड़कियों में डार्क ब्लैक फिल्म (काला शीशा) लगी कार से वे दौरा और निरीक्षण कर रहे हैं, जिस पर अब सवाल उठ खड़े हुए हैं। बता दें कि केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के नियम 100 के तहत वाहनों की खिड़कियों के शीशे काले या रंगीन नहीं होने चाहिए।

              इस कानून के अनुसार, वाहनों की खिड़कियों के साइड विंडो के शीशे 50 प्रतिशत और आगे-पीछे का शीशा 70 प्रतिशत पारदर्शी होना चाहिए। केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम (2) के तहत वाहनों में लगे काले शीशे को हटाने का प्रावधान है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 177 और 179 के तहत काला शीशा लगाने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में कलेक्टर के वाहन में काली फिल्म होना गलत है।

              गौरतलब है कि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ चेतावनी जारी की थी कि अगर किसी भी राज्य या कमिश्नरेट में आदेश का पालन नहीं करने की शिकायत मिलती है, तो अदालत संबंधित अधिकारी के खिलाफ न्यायालयों की अवमानना कानून 1971 के तहत एक्शन लेगा।

              कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा के वाहन में लगी काली फिल्म।

              कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा के वाहन में लगी काली फिल्म।

              11 साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस कमिश्नर को निर्देश जारी कर केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के तहत नियम 100 के अनुसार सभी तरह के वाहनों के विंडस्क्रीन व खिड़कियों के शीशों पर लगी काली फिल्मों को हटाने व भविष्य में किसी भी वाहन के शीशों पर इस तरह की फिल्म नहीं लगे, इसकी रोकथाम करने के आदेश दिए थे। ऐसा नहीं करने की शिकायत मिलने पर सुप्रीम कोर्ट संबंधित डीजीपी या कमिश्नर के खिलाफ न्यायालय की अवमानना कानून 1971 के तहत कार्यवाही शुरू करने की बात कही थी।

              क्यों किया गया था बैन?

              काली शीशे लगे वाहन के अंदर कौन है, अपराधी है या वीआईपी, इसका पता न तो पुलिस को चल पाता था और न ही जनता को। काले शीशे लगे वाहनों का उपयोग कई बार आपराधिक गतिविधियों के लिए होता हुआ पाया गया था। कारों से हत्या और अपहरण की वारदातों को अंजाम दिया जाता रहा है। आपराधिक चरित्र वाले लोग अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे वाहनों का उपयोग धड़ल्ले से करते रहे हैं, इसीलिए काले शीशों को बैन कर दिया गया था।

              SP ने दी सफाई

              एसपी टीआर कोशिमा ने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है, चाहे वे अफसर हों या जनप्रतिनिधि। काली फिल्म लगे वाहनों में सफर करना गलत है। मैं काली फिल्म हटाने को लेकर कलेक्टर सर से बात करूंगा।


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