भारतीय मूल की अनीता आनंद बन सकती है कनाडा की अगली PM, पेशे से वकील, 2019 से सांसद

          ओटावा: कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भारतीय मूल की सांसद अनीता आनंद का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रमुखता से लिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सत्ताधारी लिबरल पार्टी इस साल होने वाले संसदीय चुनाव से पहले नया प्रधानमंत्री चुन सकती है। बुधवार यानी आज पार्टी के नेशनल कॉकस की बैठक भी होने वाली है।

          माना जा रहा है कि पार्टी में अनीता के नाम पर सहमति बन सकती है। अगर ऐसा होता है तो वो कनाडा में प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला होंगी। फिलहाल जब तक कोई नया नेता नहीं चुन लिया जाता, तब तक ट्रूडो पद पर बने रहेंगे।

          अनीता आनंद लिबरल पार्टी की सीनियर मेंबर हैं। वह 2019 से कनाडाई संसद की सदस्य भी हैं। उन्होंने ट्रूडो सरकार में कई प्रमुख विभागों को संभाला है, जिसमें पब्लिक सर्विस और खरीद मिनिस्ट्री, नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री और ट्रेजरी बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी शामिल है। वह 2024 से ट्रांसपोर्ट और इंटरनल ट्रेड मिनिस्टर हैं।

          बता दें कि पार्टी नेताओं की तरफ से लगातार बढ़ते दबाव के बाद प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 6 जनवरी को पार्टी लीडर और PM दोनों पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी सरकार का कार्यकाल अक्टूबर तक था। वे नवंबर 2015 में देश के प्रधानमंत्री बने थे।

          अनीता आनंद 2019 में ओकविले से चुनाव जीतकर सांसद बनीं थीं। पब्लिक सर्विस मिनिस्टर के तौर पर उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

          अनीता आनंद 2019 में ओकविले से चुनाव जीतकर सांसद बनीं थीं। पब्लिक सर्विस मिनिस्टर के तौर पर उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

          कनाडा के नोवा स्कोटिया में हुआ जन्म

          57 साल की अनिता पेशे से वकील हैं। उन्होंने 2019 में कनाडा की ओकविले सीट से पहला संसदीय चुनाव जीता था, जिसके बाद उन्हें उसी साल सार्वजनिक सेवाओं और खरीद का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अनिता कनाडा का रक्षा मंत्रालय संभालने वाली दूसरी महिला हैं। इससे पहले 1990 में किम कैंबल ने ये जिम्मेदारी संभाली थी।

          अनिता के पिता तमिलनाडु जबकि मां पंजाब की रहने वाली थीं। हालांकि अनिता का जन्म और पालन-पोषण कनाडा के ग्रामीण क्षेत्र नोवा स्कोटिया में हुआ था।।

          उन्होंने क्वीन्स यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में आर्ट्स ग्रेजुएशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से न्यायशास्त्र में आर्ट्स ग्रेजुएशन, डलहौजी यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएशन और टोरंटो यूनिवर्सिटी से लॉ में मास्टर्स किया है।

          अनीता आनंद का जन्म कनाडा के ग्रामीण क्षेत्र में हुआ था।

          अनीता आनंद का जन्म कनाडा के ग्रामीण क्षेत्र में हुआ था।

          टोरंटो यूनिवर्सिटी की एसोसिएट डीन रह चुकी हैं

          अनीता टोरंटो यूनिवर्सिटी की एसोसिएट डीन भी रह चुकी हैं। उन्होंने 1995 जॉन नोल्टन से शादी की, जो एक कनाडाई वकील और बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं। उनके 4 बच्चे हैं।

          अनीता आनंद लैंगिक समानता की मुखर समर्थक रही हैं। वो LGBTQIA+ अधिकारों का सपोर्ट करती हैं। उन्होंने सेक्शुअल मिसकंडक्ट से लड़ने और कनाडाई डिफेंस फोर्सेज में कल्चरल परिवर्तन लाने के लिए पहल भी की थी। ​​

          बता दें कि प्रोग्रेसिव कंजर्वेटिव पार्टी की किम कैंपबेल 1993 में कनाडा की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं थीं, जिसके बाद से अब तक कोई महिला कनाडा में प्रधानमंत्री पद पर नहीं पहुंची है।

          ट्रूडो की पार्टी के पास बहुमत नहीं

          कनाडा की संसद हाउस ऑफ कॉमन्स में लिबरल पार्टी के 153 सांसद हैं। हाउस ऑफ कॉमन्स​​​​​​ में 338 सीटें है। इसमें बहुमत का आंकड़ा 170 है। पिछले साल ट्रूडो सरकार की सहयोगी पार्टी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) ने अपने 25 सांसदों का समर्थन वापस ले लिया था। NDP खालिस्तान समर्थक कनाडाई सिख सांसद जगमीत सिंह की पार्टी है।

          गठबंधन टूटने की वजह से ट्रूडो सरकार अल्पमत में आ गई थी। हालांकि 1 अक्टूबर को हुए बहुमत परीक्षण में ट्रूडो की लिबरल पार्टी को एक दूसरी पार्टी का समर्थन मिल गया था। इस वजह से ट्रूडो ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया था।

          हालांकि न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के नेता जगमीत सिंह ने PM ट्रूडो के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। हालांकि कनाडा की संसद को 24 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया है, ऐसे में लिबरल पार्टी के पास बहुमत जुटाने और नया नेता चुनने के लिए 60 दिन से ज्यादा का वक्त है।

          ट्रूडो के खिलाफ क्यों है नाराजगी

          कनाडा के लोगों में लगातार बढ़ती मंहगाई के वजह से ट्रूडो के खिलाफ नाराजगी है। इसके अलावा पिछले कुछ समय से कनाडा में कट्टरपंथी ताकतों के पनपने, अप्रवासियों की बढ़ती संख्या और कोविड-19 के बाद बने हालातों के चलते ट्रूडो को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

          पिछले साल अक्टूबर में हुए इप्सोस के एक सर्वे में सिर्फ 28% कनाडाई लोगों का कहना था कि ट्रूडो को फिर से चुनाव लड़ना चाहिए। वहीं एंगस रीड इंस्टीट्यूट के मुताबिक ट्रूडो की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 30% पर आ गई है। दूसरी तरफ उन्हें नापसंद करने वालों की संख्या 65% तक पहुंच गई है।

          देश में हुए कई सर्वे के मुताबिक अगर कनाडा में चुनाव होते हैं तो कंजर्वेटिव पार्टी को बहुमत मिल सकता है, क्योंकि जनता बढ़ती महंगाई से परेशान है।



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