बांग्लादेश: पूर्व पीएम खालिदा जिया की हालत बेहद गंभीर, सीने में इन्फेक्शन के चलते 5 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था

        ढाका: बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया की हालत बेहद गंभीर है। यह जानकारी उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा इस्लाम आलमगीर ने शुक्रवार को दी।

        80 साल की खालिदा जिया BNP की अध्यक्ष हैं। वे पिछले कई साल से लिवर, किडनी, डायबिटीज, गठिया और आंखों की परेशानी से जूझ रही हैं।

        आलमगीर ने कहा, “कल रात डॉक्टरों ने बताया कि उनकी शारीरिक स्थिति बेहद गंभीर है। हमने 23 नवंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें सीने में इन्फेक्शन हो गया था, जिसका असर उनके दिल और फेफड़ों पर पड़ा।”

        आलमगीर ने कहा कि खालिदा जिया की जल्द सेहत सुधार के लिए शुक्रवार की नमाज (जुम्मा) के बाद विशेष दुआओं का आयोजन किया। हम प्रार्थना करते हैं कि वह ठीक होकर वापस आएं और देश के लिए फिर से काम कर सकें।

        हसीना को लिवर सिरोसिस, हार्ट डिजीज और किडनी की बीमारी है।

        हसीना को लिवर सिरोसिस, हार्ट डिजीज और किडनी की बीमारी है।

        2018 में 10 साल की सजा मिली

        खालिदा जिया को 8 फरवरी 2018 को ढाका की स्पेशल कोर्ट ने जिया अनाथालय ट्रस्ट के नाम पर सरकारी पैसे का गबन करने के आरोप में 5 साल की सुनाई थी। खालिदा के बेटे तारिक और अन्य 5 आरोपियों को भी 10 साल कठोर कारावास की सजा दी गई थी।

        इन पर 2.1 करोड़ बांग्लादेशी टका का जुर्माना भी लगा था। तारिक और अन्य 2 आरोपी फरार हो गए थे। जिया ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2018 को सुनवाई करते हुए सजा को बढ़ाकर 10 साल कर दिया था।

        इसके बाद खालिदा ने सजा के खिलाफ लीव-टू-अपील यानी सीधे सर्वोच्च अदालत में चुनौती देने की अपील की थी। 5 साल तक कानूनी प्रक्रियाओं के चलते इसमें देरी होती रही।

        शेख हसीना के देश छोडने के बाद रिहा हुईं

        खालिदा जिया दो बार 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान की पत्नी हैं। उनके बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारीक रहमान 2008 से लंदन में रह रहे हैं। वहीं, उनके छोटे बेटे अराफात रहमान का 2025 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

        शेख हसीना के तख्तापलट के 1 दिन बाद खालिदा जिया को 6 अगस्त 2024 को रिहा किया गया था। इसके बाद वह बेहतर इलाज के लिए लंदन चली गई थीं। 4 महीने वहां रहने के बाद वे 6 मई को देश लौटीं।

        शेख हसीना की विरोधी हैं खालिदा जिया

        बांग्लादेश की राजनीति दो नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अवामी लीग की नेता शेख हसीना और BNP की खालिदा जिया। 1980 के दशक में बांग्लादेश में सैन्य शासन था। तब सैन्य शासन के खिलाफ हसीना और खालिदा सड़क पर साथ-साथ आंदोलन करती थीं।

        1990 में तानाशाह इरशाद की विदाई के बाद लोकतंत्र लौटा। 1991 में चुनाव जीतने के बाद खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच राजनीतिक दुश्मनी बढ़ गई। 1990 के बाद बांग्लादेश में जब भी चुनाव हुए, सत्ता या तो खालिदा जिया के पास गई या शेख हसीना के पास। मीडिया इसे ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ यानी दो बेगमों की लड़ाई नाम देती है।

        बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना (बाएं) और खालिदा जिया (दाएं) कभी दोस्त हुआ करती थीं।

        बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना (बाएं) और खालिदा जिया (दाएं) कभी दोस्त हुआ करती थीं।

        बांग्लादेश को आजाद कराने वाले रहमान की पत्नी हैं खालिदा जिया

        खालिदा जिया का जन्म 1945 में हुआ। वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं थीं और राजनीति से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। 1960 में एक सैनिक जियाउर रहमान से उनकी शादी हुई।

        1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई हुई। इस दौरान शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिए गए।

        इसी समय जियाउर रहमान ने रेडियो पर एक घोषणा पढ़ी, जिसमें उन्होंने बताया कि वे ‘स्वतंत्र बांग्लादेश’ की ओर से लड़ रहे हैं। जंग खत्म होने के बाद जब बांग्लादेश बना तो रहमान वापस सेना में लौटे। उन्हें सेना में बड़ा पद मिला।

        रहमान राजनीतिक रूप से भी एक प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखे जाने लगे। 1975 में शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार की हत्या के बाद देश में लगातार तख्तापलट होता रहा। सेना में गुटबाजी इतनी बढ़ गई कि कुछ ही महीनों में कई बार सत्ता बदली।

        इस अस्थिर माहौल में जिया धीरे-धीरे सबसे ताकतवर सैन्य नेता बनकर उभरे और 1977 में वे देश के राष्ट्रपति बन गए। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) नाम से एक नया राजनीतिक दल बनाया। यही पार्टी आज उनकी पत्नी खालिदा जिया और बेटा तारिक रहमान चला रहे हैं।

        बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और उनकी पत्नी खालिदा जिया।

        बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और उनकी पत्नी खालिदा जिया।

        पति की मौत के बाद राजनीति में एंट्री

        30 मई 1981 को रहमान की हत्या कर दी गई। वे चिटगांव में थे, जब सेना के कुछ बागी अधिकारियों ने विद्रोह कर दिया और गोलीबारी में उनकी मौत हो गई।

        पति की मौत के बाद BNP पार्टी बिखरने लगी और पार्टी के नेताओं ने खालिदा को नेतृत्व संभालने के लिए मनाया। शुरू में वह तैयार नहीं थीं, लेकिन 1984 में उन्होंने पार्टी की कमान संभाल ली।

        1991 में जब बांग्लादेश में पहली बार सही मायने में लोकतांत्रिक चुनाव हुए, तो खालिदा जिया की BNP पार्टी ने जीत हासिल की और वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 1996 में उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी, लेकिन 2001 में वह फिर से प्रधानमंत्री बनीं।



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