बांग्लादेश: रहमान सरकार भारत की जगह चीन से दोगुनी कीमत चुका कर बिजली खरीद रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

            ढाका: बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है।

            भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है।

            बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी

            भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था।

            बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही।

            चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम

            अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा।

            करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी।

            बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है।

            बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा

            चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

            अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है।

            रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा।


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