BIG NEWS: हूती विद्रोहियों के खिलाफ साथ आए 3 देश, सऊदी अरब में तैनात होंगी पाकिस्तान-तुर्किये की फौज

        रियाद: लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने अब सऊदी अरब को सीधे सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इसी बीच पाकिस्तान और तुर्किये भी सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य बल तैनात करने की तैयारी में हैं।

        सोमवार को रियाद में मक्का रक्षा समझौते की इमरजेंसी मीटिंग हुई। इसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने सामूहिक रक्षा व्यवस्था को सक्रिय करने और सऊदी अरब में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती पर सहमति जताई।

        इससे पहले भी सऊदी ने पाकिस्तान से सैन्य मदद मांगी थी। हालांकि, पाकिस्तान ने सितंबर में मदद देने से इनकार कर दिया था। यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने तब कहा था कि उसकी सेना किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी।

        तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 7 अगस्त को मक्का में रक्षा समझौते पर साइन किया था।

        तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 7 अगस्त को मक्का में रक्षा समझौते पर साइन किया था।

        हूती विद्रोही पीछे हटे, बाब अल-मंदेब पर सऊदी समर्थित गुट मजबूत

        सितंबर में हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर तेजी से बढ़ते हुए मोचा शहर और बाब अल-मंदेब के आसपास के कई अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया था। इससे इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर हूतियों की पकड़ मजबूत हो गई थी।

        लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। 5 अक्टूबर को सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ बड़ा जवाबी अभियान शुरू किया। यमनी सेना ने बाब अल-मंदेब के पास धुबाब इलाके और कई अहम ठिकानों पर दोबारा कब्जे का दावा किया।

        इसके बाद सेना मोचा की तरफ बढ़ी और यमनी सरकार ने शहर को भी हूतियों से वापस लेने का दावा किया। रॉयटर्स के मुताबिक, सरकारी बलों ने हूतियों को पिछले महीने कब्जे में लिए गए ज्यादातर इलाकों से पीछे धकेल दिया है।

        सऊदी अरब जल्द हूतियों पर हमला कर सकता है

        सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को यमन में उतार सकता है। इसका मकसद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है।

        रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं –

        • पहला विकल्प: बाब अल-मंदेब के आसपास सीमित हमला करके समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने की कोशिश की जाएगी।
        • दूसरा विकल्प: यमन के कई इलाकों में एक साथ ऑपरेशन चलाया जा सकता है। इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं।

        इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है।

        मक्का पैक्ट लागू- एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा

        रियाद में सोमवार को हुई बैठक के साथ मक्का रक्षा समझौता औपचारिक रूप से लागू हो गया। इसके तहत एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

        बैठक में तीनों देशों के वरिष्ठ रक्षा और सैन्य अधिकारी शामिल हुए। तुर्किये से विदेश मंत्री हाकान फिदान और रक्षा मंत्री याशार ग्यूलर, जबकि सऊदी अरब से विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान मौजूद रहे।

        पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री इशाक डार, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ शामिल हुए। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद भी बैठक में मौजूद रहे, जिन्हें मक्का रक्षा समझौते का महासचिव नियुक्त किया गया है।



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