BIG NEWS: केंद्र सरकार का फैसला, अब पेट्रोल पंप पर केरोसिन भी मिलेगा, हर जिले में 2 पंपों पर सुविधा होगी, तेल कंपनियां 5 हजार लीटर स्टॉक रख सकेंगी

              नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने रविवार को फैसला लिया है कि अब राशन की दुकानों के साथ-साथ पेट्रोल पंप पर भी केरोसिन मिल सकेगा। अब सरकारी तेल कंपनियां तय किए गए पेट्रोल पंपों से भी केरोसिन रख और बांट सकेंगी।

              हर जिले में राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन अधिकतम 2 पेट्रोल पंप चुनेंगे, जहां यह सुविधा दी जाएगी। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5 हजार लीटर तक केरोसिन रखा जा सकेगा।

              सरकार ने सप्लाई आसान बनाने के लिए 60 दिनों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के नियमों में ढील दी है, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक तेल समय पर पहुंच सके।

              सरकार ने ये फैसला अमेरिका-इजराइल के ईरान संघर्ष के कारण लिया गया है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण भारत में गैस, पेट्रोल-डीजल की कमी है। केंद्र सरकार लगातार मौजूदा हालात पर चिंता जता रही है।

              नियमों में क्या छूट दी गई

              • केरोसिन बांटने वाले एजेंट और डीलरों को लाइसेंस लेने से छूट दी गई है
              • टैंकरों से केरोसिन उतारने (सप्लाई) के नियम भी आसान किए गए हैं
              • पेट्रोल पंपों पर केरोसिन स्टोर और वितरण की अस्थायी अनुमति दी गई है

              सरकार बोली- कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक

              सरकार के अनुसार सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है। घरेलू खपत को देखते हुए रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है।

              कुछ राज्यों में अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर भीड़ और ज्यादा बिक्री देखने को मिली। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की कमी नहीं है और लोगों से अपील की गई है कि घबराकर खरीदारी न करें।

              LPG और गैस सप्लाई की स्थिति

              • घरेलू एलपीजी की सप्लाई सामान्य है, किसी डिस्ट्रीब्यूटर पर कमी की सूचना नहीं
              • एक दिन में 55 लाख से ज्यादा सिलेंडर डिलीवर किए गए
              • ऑनलाइन बुकिंग बढ़कर 94% तक पहुंची
              • CNG और PNG उपभोक्ताओं को 100% सप्लाई दी जा रही है

              केरोसिन और वैकल्पिक ईंधन पर जोर

              सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त 48000 किलो लीटर (4 करोड़ 80 लाख लीटर) केरोसिन आवंटित किया है। एलपीजी की मांग कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

              सरकार ने सिटी गैस कंपनियों को होटल, रेस्टोरेंट और कॉमर्शियल संस्थानों में PNG कनेक्शन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। औद्योगिक और कॉमर्शियल गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल औसत खपत की 80% गैस दी जा रही है।

              29 मार्च: पीएम मोदी ने कहा- जंग के चलते दुनिया में पेट्रोल-डीजल का संकट

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 132वें एपिसोड में अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का जिक्र किया। पीएम ने कहा था कि दुनिया में जंग चल रही है। पेट्रोल-डीजल का संकट पैदा हुआ है, लेकिन भारत इस चुनौती से निपट रहा है।

              सरकार लोगों से अपील करती है कि किसी तरह की अफवाहों में न आएं। सरकार की तरफ से जानकारी पर भरोसा करें। कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश में लगे हैं। इससे वे देश का नुकसान कर रहे हैं।

              27 मार्च: पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटी, दाम नहीं बढ़ेंगे

              सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 कर दी। वहीं, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 से शून्य कर दी गई। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा है।

              यूएस-इजराइल के साथ ईरान की जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को 30 रुपए प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था। घाटा कवर करने के लिए तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं।

              इनडायरेक्ट टैक्स है एक्साइज ड्यूटी

              यह एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स है, जो देश के भीतर मैन्युफैक्चर होने वाले सामान पर लगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के मामले में जब कच्चा तेल रिफाइनरी से साफ होकर बाहर निकलता है, तब केंद्र सरकार उस पर प्रति लीटर के हिसाब से फिक्स्ड एक्साइज ड्यूटी वसूलती है।

              चूंकि एक्साइज ड्यूटी फिक्स होती है, इसलिए सरकार इसमें कटौती करके आम जनता को राहत दे सकती है या इसे बढ़ाकर अपना रेवेन्यू बढ़ाती है। मौजूदा कटौती से सरकार का राजस्व कम होगा, लेकिन तेल कंपनियों को घाटा कम करने में मदद मिलेगी।


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