BIG NEWS: गगनयान को सुरक्षित धरती पर लाने वाले ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण, ज्यादा लोड डालकर किया चेक

              चंडीगढ़: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए ड्रोग पैराशूट का क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। क्वालिफिकेशन लेवल टेस्ट में अधिकतम उड़ान भार से ज्यादा लोड डालकर पैराशूट की मजबूती और सुरक्षा मार्जिन की जांच की गई।

              इस टेस्ट के बाद पक्का हुआ कि भारत मजबूत और बड़ी क्षमता वाले रिबन पैराशूट को डिजाइन और बनाने में पूरी तरह सक्षम है। साथ ही पैराशूट असली मिशन जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित और ठीक तरह से काम करेगा।

              गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए ड्रोग पैराशूट बहुत जरूरी है। जब कैप्सूल पृथ्वी के वातावरण में लौटता है, तो यही पैराशूट उसकी तेज गति को कम करने में मदद करता है।

              यह टेस्ट बुधवार (18 फरवरी) को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में किया गया। यह डायनेमिक टेस्ट डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की स्पेशल हाई-स्पीड एयरोडायनेमिक और बैलिस्टिक मूल्यांकन सुविधा RTRS में पूरा हुआ।

              इसमें इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (ISRO) के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), DRDO की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) और TBRL की टीमों ने भाग लिया।

              24 अगस्त 2025 को स्पेस से वापसी के क्रू मॉड्यूल का टेस्ट किया गया था।

              24 अगस्त 2025 को स्पेस से वापसी के क्रू मॉड्यूल का टेस्ट किया गया था।

              गगनयान मिशन के बारे में जानें…

              इसरो का गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजकर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। इसमें भारत में विकसित क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल और जीवन रक्षक प्रणालियों का उपयोग होगा।

              मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में कुछ समय बिताने के बाद सुरक्षित लैंडिंग करेंगे। गगनयान के सफल होने से भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

              गगनयान मिशन से भारत को क्या हासिल होगा

              • स्पेस एक बढ़ती हुई इकोनॉमी है, जो 2035 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 154 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी। इसलिए भारत का इसमें बना रहना जरूरी है।
              • रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत स्पेस में इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।
              • स्पेस के जरिए सोलर सिस्टम के अन्य पहलुओं की रिसर्च का रास्ता खुलेगा।
              • भारत को खुद का स्पेस स्टेशन बनाने के प्रोजेक्ट में मदद मिलेगी।
              • रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में नए रोजगार बनेंगे।
              • निवेश बढ़ेगा, जिससे इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।
              • स्पेस इंडस्ट्री में काम कर रहे दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा।

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