बड़ी खबर: भारत-US ट्रेड डील में भारत को और राहत, दाल और 500 अरब डॉलर की खरीद भी जरूरी नहीं

          वॉशिंगटन डीसी/नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत के साथ हुई हालिया ट्रेड डील पर जारी अपनी फैक्ट शीट में कई बड़े बदलाव किए हैं। पहले जिन बातों का साफ जिक्र था, अब उन्हें या तो हटा दिया गया है या उनकी भाषा बदली गई है।

          पिछले हफ्ते दोनों देशों ने ट्रेड डील का ऐलान किया था। इसके बाद व्हाइट हाउस ने एक फैक्ट शीट जारी कर आगे की रूपरेखा बताई थी, लेकिन अब उसी दस्तावेज का नया वर्जन जारी हुआ है।

          सबसे बड़ा बदलाव दाल को लेकर है। पहले कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा, जिसमें दाल भी शामिल थी। अब नए दस्तावेज से दाल का जिक्र हटा लिया गया है।

          500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर भी भाषा बदली गई है। पहले लिखा था कि भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए ‘कमिटेड’ है। अब इसे बदलकर ‘इरादा रखता है’ कर दिया गया है।

          डिजिटल सर्विस टैरिफ पर भी अमेरिका के रुख में नरमी

          नए दस्तावेज में सिर्फ एनर्जी, सूचना और संचार तकनीक, कोयला और कुछ अन्य सामान की बात कही गई है। डिजिटल सर्विस टैरिफ पर भी अमेरिका ने नरमी दिखाई है। पहले कहा गया था कि भारत यह टैरिफ हटाएगा। अब सिर्फ इतना लिखा है कि भारत डिजिटल ट्रेड के नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है।

          अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल इम्पोर्ट के कारण पेनल्टी के रूप में लगाए गए 25% टैरिफ को वापस करने का भी फैसला लिया है।

          इस फैसले से भारतीय कारोबारियों को ₹40 हजार करोड़ की राहत मिलने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 27 अगस्त 2025 से लेकर 6 फरवरी 2026 के बीच अमेरिका द्वारा किए गए जिन इम्पोर्ट पर यह पेनल्टी लगी थी, उनका रिफंड दिया जाएगा।

          यह रिफंड अमेरिका के कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन कानून के तहत जारी किया जाएगा। भारतीय निर्यातकों को कितना रिफंड मिलेगा, ये अभी तय नहीं है। क्योंकि रिफंड की राशि अमेरिकी इम्पोर्टर को दी जाएगी, फिर वे भारतीय एक्सपोर्टर के साथ बातचीत करके इस राशि का बंटवारा करेंगे।

          भारत पर नजर रखने के लिए टास्क फोर्स गठित

          ट्रेड डील को लेकर अंतरिम समझौते के ढांचे के अनुसार भारत रूस से तेल का आयात दोबारा शुरू न करे, इस पर निगरानी रखने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तीन मंत्रियों की एक टास्क फोर्स का गठन किया है।

          इसमें वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं। इस समिति को लगता है कि भारत ने रूस से तेल का इम्पोर्ट दोबारा शुरू कर दिया है, तो वह राष्ट्रपति ट्रम्प को दोबारा 25% पेनल्टी लगाने और अन्य कार्रवाई करने के लिए सिफारिश कर सकती है।

          भारत को इस समझौते से मिलने वाले लाभ

          अमेरिकी टैरिफ में कमी: भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका के टैरिफ को 18% तक घटाया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।

          चुनिंदा उत्पादों पर जीरो टैरिफ: जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे और विमान पार्ट्स पर पूरी तरह टैरिफ खत्म किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

          30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच: भारतीय MSME, किसान, मछुआरे, महिलाओं और युवा उद्यमियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश।

          निर्यात क्षेत्रों में बढ़ावा: टेक्सटाइल, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी में नए अवसर।

          सेक्शन 232 छूट: विमान पार्ट्स पर अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत छूट मिलेगी।

          ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा: कुछ ऑटो कंपोनेंट्स के लिए अमेरिका में विशेष पहुंच मिलेगी।

          जेनेरिक दवाओं पर बेहतर शर्तें: भारतीय जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स के लिए टैरिफ और नियामक नियमों में सुधार।



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